"रेप का आरोप लगाने के बाद शिकायतकर्ता आरोपी के साथ घूमती रही और उसकी खातिरदारी का आनंद लेती रही" : गुजरात हाईकोर्ट ने आरोपी को ज़मानत दी
Gujarat High Court
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में पीड़िता का सामूहिक बलात्कार करने में शामिल आरोपी व्यक्ति को जमानत दी। कोर्ट ने यह देखते हुए आरोपी को जमानत दी कि बाद में पीड़िता के आरोपी के साथ बहुत दोस्ताना संबंध थे। इस तरह के गंभीर आरोप लगाने के बाद भी वह उसके साथ यात्रा कर रही थी। उसकी खातिरदारी का आनंद ले रहे थी।
जस्टिस राजेंद्र सरीन ने कहा,
"ऊपर बताए गए तथ्यों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि शिकायतकर्ता का आवेदक के साथ बहुत दोस्ताना संबंध है। इससे बलात्कार का आरोप भी अनुचित प्रतीत होता है, क्योंकि पहले शिकायतकर्ता आवेदक की खातिरदारी का आनंद ले रही थी और अन्य आरोपी ने उसके साथ रेप किया। ऐसे मामले में शिकायतकर्ता के लिए लगातार आरोपी का आतिथ्य स्वीकार करने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है, जब शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे इस तरह के जघन्य अपराध के अधीन किया जा रहा था।"
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि पीड़िता अच्छी तरह से शिक्षित है। वह गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से नहीं है, जिससे उसे अभियुक्तों के साथ जाने के लिए मजबूर किया जा सके।
अदालत ने इन आरोपों में भी दम नहीं पाया कि बलात्कार की वीडियोग्राफी की गई। साथ ही वारदात से पहले शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल किया गया, क्योंकि जांच के बावजूद इसे साबित करने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है।
अदालत सह-आरोपी को दी गई जमानत के आधार पर मुख्य आरोपी द्वारा दायर की गई जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। उक्त आरोपियों भारतीय दंड़ संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (डी), 120 (बी), 406, 294 (बी), 506 (2), 328, 362 और 114 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एपीपी ने इस आधार पर आवेदन का विरोध किया कि अभियोजन पक्ष ने पहले शिकायतकर्ता को धमकी दी। उसे मामले को निपटाने के लिए धमकाया गया। इसलिए, आवेदक को रिहा करने से सबूतों से छेड़छाड़ होने की आशंका होगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने वास्तव में आरोपी के साथ गांधीधाम की यात्रा की और उस यात्रा के दौरान आरोप लगाए गए। उक्त आरोपों में आवेदक का नाम नहीं है। फिर अहमदाबाद लौटने के बाद वह छुट्टियां मनाने गोवा गए थी।
अदालत ने कहा,
"इन तथ्यों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि संभवत: 11.09.2020 को ऐसी कोई घटना नहीं हुई, इसलिए पहले शिकायतकर्ता ने बिल्कुल सामान्य व्यवहार किय।"
तदनुसार, अदालत ने आवेदक को दो लाख रुपये के निजी मुचलके के तहत जमानत दे दी।
केस नंबर: आर/सीआर.एमए/11992/2022
केस टाइटल: प्रग्नेश हर्षदभाई पटेल @ पी.जी. @ प्रग्नेश गोटा बनाम गुजरात राज्य
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