पटना हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू की अध्यक्षता वाली एक डिवीज़न बेंच ने 1000 से ज़्यादा लंबे समय से लंबित आपराधिक अपीलों का निपटारा किया। इन अपीलों में से कुछ अपीलें तो 1994 की थीं।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस साहू ने इसी साल जनवरी में पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस के तौर पर शपथ ली थी। वह गुरुवार (4 जून) को अपने पद से रिटायर होने वाले हैं।

कोर्ट ने 1994 की एक लंबित आपराधिक अपील (आपराधिक अपील संख्या 87/1994, जिसका शीर्षक है 'छठी लाल बिन बनाम बिहार राज्य') पर सुनवाई करते हुए कई निर्देश जारी किए। कोर्ट ने यह कदम उन मामलों का निपटारा करने के मकसद से उठाया, जो अपील करने वाले की मौत हो जाने या अपील करने वाले के परिवार द्वारा अपील दायर न किए जाने के कारण खत्म हो गए।

21 जनवरी, 2026 का आदेश

21 जनवरी को रजिस्ट्री ने कोर्ट के सामने 1994 से 2015 के बीच दायर लंबित आपराधिक अपीलों (DB) का डेटा पेश किया। इन मामलों में अपील करने वाले ज़मानत पर थे, और कोर्ट ने संबंधित अपील करने वालों की "हाल-चाल रिपोर्ट" (well-being reports) मांगी थी।

तब कोर्ट ने निर्देश दिया था,

"पुलिस अधीक्षक (SP) संबंधित थाना प्रभारी (SHO) से एक तथ्यात्मक और विधिवत सत्यापित रिपोर्ट प्राप्त करेंगे। इसके लिए वे स्थानीय स्तर पर ज़रूरी पूछताछ करेंगे और उपलब्ध रिकॉर्ड व स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करेंगे। यदि अपील करने वाला या अपील करने वाले जीवित नहीं हैं (उनकी मृत्यु हो चुकी है) तो रिपोर्ट के साथ उनका मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो) संलग्न किया जाएगा। यदि मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है तो संबंधित इलाके के स्थानीय सरपंच, वार्ड सदस्य या पार्षद से प्राप्त रिपोर्ट संलग्न की जाएगी। संबंधित पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि ये रिपोर्टें आज से तीन सप्ताह के भीतर इस कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दी जाएं।"

15 अप्रैल, 2026 का आदेश

इसके बाद 15 अप्रैल को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह संबंधित पुलिस अधिकारियों को भेजे गए पत्रों और अनुस्मारकों (Reminders) की तारीखें, उन पर प्राप्त जवाबों की स्थिति, अपील करने वालों के हाल-चाल की स्थिति और अब तक निपटाए जा चुके मामलों का विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।

आदेश दिनांक 4 मई, 2026

इसके बाद 4 मई के अपने आदेश में अदालत ने राज्य भर के विभिन्न पुलिस अधीक्षकों और अन्य पुलिस अधिकारियों से संबंधित अपीलकर्ताओं की "कुशल-क्षेम रिपोर्ट" (well-being reports) फिर से मांगी। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे यह डेटा रजिस्ट्री को उपलब्ध कराएं।

इस तारीख को रजिस्ट्री ने बताया कि कुल 12,393 मामलों में संपर्क किया गया, जिनमें से 5,044 मामलों में रिपोर्ट प्राप्त हो गई थीं, जबकि 7,349 मामलों में रिपोर्ट का इंतजार था। जिन अपीलकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी थी, उनकी पहचान की गई संख्या और निपटाए गए मामलों की संख्या 410 थी।

आदेश दिनांक 15 मई, 2026

15 मई के अपने आदेश में अदालत ने विभिन्न क्षेत्रों की देखरेख करने वाले प्रत्येक पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों का संज्ञान लिया। ये रिपोर्टें लंबित आपराधिक अपीलों की स्थिति और संबंधित अपीलकर्ताओं की कुशल-क्षेम के संबंध में थीं। डेटा की समीक्षा करने के बाद अदालत ने संबंधित जिलों से शेष रिपोर्टें जमा करने के लिए 19.05.2026 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की।

इसके बाद 26 मई को उन सभी आपराधिक अपीलों को खंडपीठ (Division Bench) द्वारा सुनवाई के लिए लिया गया, जिनमें एकमात्र अपीलकर्ता या सभी अपीलकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी थी, और जहां कानूनी वारिसों द्वारा अपील जारी रखने के लिए याचिका दायर की गई।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, हाईकोर्ट ने फरवरी से मई के बीच 1000 से अधिक आपराधिक अपीलों का निपटारा किया।

इसके अतिरिक्त, जिन मामलों में आपराधिक अपीलें लंबित रहने के दौरान एकमात्र अपीलकर्ता या सभी अपीलकर्ताओं की मृत्यु हो गई और किसी भी निकट संबंधी ने 'अनुमति के लिए आवेदन' (Application for Leave) दायर करके अपील जारी रखने की मांग नहीं की थी, साथ ही जहां राज्य ने जुर्माने की राशि की वसूली पर जोर नहीं दिया था; ऐसे मामलों में खंडपीठ ने दोषसिद्धि के विरुद्ध आपराधिक अपीलों के लंबे समय से लंबित होने को ध्यान में रखते हुए जुर्माने की सज़ा रद्द की, कारावास की सज़ा के संबंध में अपील को 'समाप्त' (Abated) मानते हुए अपील का निपटारा किया।

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