उत्तर प्रदेश के एक वकील एसएम हैदर रिज़वी ने राज्य के मुजफ्फरनगर जिले के एक निजी स्कूल की शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का रुख किया है। शिक्षक पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने और कक्षा दो के सभी छात्रों को अपने सहपाठी मुस्लिम बच्चे को थप्पड़ मारने का निर्देश देने का आरोप लगाया गया है ।

यह घटनाक्रम कथित घटना का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के कुछ घंटों बाद आया है और मुजफ्फरनगर पुलिस ने तृप्ता त्यागी (नेहा पब्लिक स्कूल की शिक्षिका) के खिलाफ एफआईर दर्ज की है ।

वकील रिजवी द्वारा दी गई शिकायत में त्यागी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए, 295ए, 298, 323, 504 और 506 के तहत एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। इसमें पीड़ित स्कूली छात्र को मुआवजा देने और राज्य के खर्च पर दिल्ली या किसी अन्य जिले के स्कूल में उसका दाखिला कराने की भी मांग की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि यह घटना शिक्षक की "विकृत" मानसिकता को उजागर करती है जो "एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत का पोषण करती है।"

" यह वीडियो, जिसे दुनिया भर में सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था, न केवल हमारे देश की छवि और प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर भी आघात करता है, जो पहले से ही ऐसे ही बेईमान तत्वों के कारण काफी खराब हो चुका है, जिनकी मंशा ऐसी है।" 

शिकायत में आगे कहा गया है, '' केवल देश और प्रशासन का मज़ाक़ उड़ाते हुए सौहार्द और भाईचारे से रह रहे विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच दूरी बनाने के अपने नापाक इरादे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।''

शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि शिक्षक के आपराधिक कृत्य से राज्य और देश में दंगों की स्थिति पैदा करने वाले समुदायों के बीच दरार पैदा होने की संभावना है, जिसके बड़े, बड़े प्रभाव हो सकते हैं।

गौरतलब है कि शिकायत में इस मामले की जांच सीबीआई, एटीएस जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि एसएसपी मुजफ्फरनगर ने यह कहकर "मामले को छुपाने की कोशिश की" कि जिस बच्चे की पिटाई की गई, वह विशेष पहाड़ा (table) पढ़ने में सक्षम नहीं था और यही कारण था कि उसकी पिटाई की गई।

शिकायत में आगे कहा गया है, " यह बयान न केवल एक दिखावा है, बल्कि एक गलत बयान है जो तथ्यात्मक रूप से भी गलत है और यह साबित करता है कि मुजफ्फर नगर की जिला पुलिस स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने की स्थिति में नहीं होगी।"

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