स्पेशल NIA कोर्ट ने सचिन वाज़े को ज़मानत दी, जिन पर चर्चित एंटीलिया बम केस और मनसुख हिरेन मर्डर केस में आरोप लगे।
बर्खास्त असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) वाज़े को लंबी जेल की सज़ा और उनकी लीगल टीम (जिसमें वकील सजल यादव और शलभ सक्सेना शामिल थे) की दलीलों के आधार पर ज़मानत दी गई।
NIA के मुताबिक, 25 फरवरी को अंबानी के घर के पास एक स्कॉर्पियो कार मिली थी, जिसमें विस्फोटक और एक धमकी भरा लेटर था। बिज़नेसमैन मनसुख हिरेन ने दावा किया कि गाड़ी एक हफ़्ते पहले उनसे चोरी हो गई, 5 मार्च को ठाणे की एक खाड़ी में मृत पाए गए।
NIA ने कहा कि वाज़े विस्फोटक रखने और हिरेन की हत्या में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि 'हत्यारों' ने 4 मार्च को हिरेन की हत्या के ठीक बाद वाज़े और पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को फ़ोन किया था।
वाज़े को 13 मार्च को गिरफ़्तार किया गया। इसके बाद NIA ने कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे और बुकी नरेश गोरे को गिरफ़्तार किया। वाज़े के करीबी सहयोगी API रियाज़ुद्दीन काज़ी (क्राइम ब्रांच यूनिट इंचार्ज) और सुनील माने को भी बाद में गिरफ़्तार किया गया।
11 जून को संतोष शेलार और आनंद जाधव को हिरासत में लिया गया। प्रदीप शर्मा और मनसुख हिरेन के कथित हत्यारों - सतीश मुथुकरी और मनीष सोनी - को 17 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया।
शुरुआत में वाज़े ही इस केस की जांच कर रहे थे। हालांकि, बाद में इसे स्टेट एंटी-टेररिज्म स्क्वाड और फिर मार्च 2021 में NIA को सौंप दिया गया।
आरोपियों पर हत्या और UA(P) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।