नाबालिग ने बीमार पिता को लीवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति मांगी, दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

Update: 2021-09-16 06:49 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट में अपने माँ के माध्यम से एक याचिका दायर कर 17 साल की एक नाबालिग ने दिल्ली सरकार और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (ILBS) को अपने बीमार पिता को अपने लीवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति देने के लिए निर्देश दिए जाने की मांग की।

याचिकाकर्ता के पिता लीवर फेल्योर के एडवांस स्टेज से पीड़ित हैं।

याचिकाकर्ता की मां और बड़े भाई दोनों को चिकित्सकीय आधार पर अंगदान करने से मना कर दिया गया है।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता को नाबालिग होने के नाते लीवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

नाबालिग की उम्र अभी 17 साल, 8 महीने, 19 दिन है।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली बुधवार ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और प्रतिवादियों को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया।

इसके साथ ही पीठ ने मामले को 24 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले प्रत्युत्तर दायर किया जाए।

अधिवक्ता प्रसून कुमार के माध्यम से दायर याचिका संचालन उप प्रमुख, आईएलबीएस और सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 अगस्त, 2021 को पारित आदेश से उत्पन्न होती है। इसमें याचिकाकर्ता को अपने पिता को अपने जिगर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

याचिका में कहा गया,

"मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के अनुसार, जिसे इसके बाद 1994 अधिनियम कहा जाता है, नाबालिग द्वारा मानव अंग या ऊतक दान करने के लिए कोई पूर्ण निषेध नहीं है। एक नाबालिग को भी अंग और ऊतक दान करने की अनुमति है। सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से मानव अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण नियम 2014 के नियम 5 (3) (जी), जीवित अंग या ऊतक, नाबालिग द्वारा दान की अनुमति नहीं है। अलावा इसके कि चिकित्सा आधार के तहत औचित्य और सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के साथ विस्तार से सिफारिश की जानी चाहिए।"

इसलिए याचिकाकर्ता का यह मामला है कि प्राधिकरण द्वारा पारित आक्षेपित आदेश उनकी ओर से दिमाग का प्रयोग न करने को दर्शाता है।

याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अत्यावश्यकता को देखते हुए सुनवाई की अगली तारीख पर आईएलबीएस का एक जिम्मेदार अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में मौजूद रहेगा।

केस शीर्षक: सौरव सुमन अपनी मां बनाम जीएनसीटीडी और एएनआर के माध्यम से

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