IPL सट्टेबाजी मामला: एमएस धोनी को सीडी के अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश

Update: 2026-02-12 11:02 GMT

मद्रास हाइकोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। यह राशि उन पुरानी सीडी के अनुवाद और लिप्यंतरण (ट्रांसक्रिप्शन) के खर्च के रूप में तय की गई, जो उनके द्वारा दायर 100 करोड़ रुपये के मानहानि वाद से संबंधित हैं।

जस्टिस आर.एन. मंजुला ने कहा कि सीडी में मौजूद सामग्री का अनुवाद और टंकण करना एक बहुत बड़ा कार्य है, जिसमें दुभाषिया और टाइपिस्ट का लगभग तीन से चार महीने का पूरा समय लग सकता है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया का खर्च वादी होने के नाते धोनी को ही वहन करना होगा।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

“सामान्य परिस्थितियों में किसी वाद में वादी का यह दायित्व होता है कि वह आवश्यक दस्तावेजों का अनुवाद कराकर उन्हें वादपत्र के साथ प्रस्तुत करे। पूर्व आदेश दिनांक 28.10.2025 में वर्णित परिस्थितियों को देखते हुए, जब आधिकारिक दुभाषिया की आवश्यकता है तब इस कार्य की लागत का भुगतान करना वादी की जिम्मेदारी है।”

यह मामला वर्ष 2014 में दायर उस 100 करोड़ रुपये के मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसमें धोनी ने जी मीडिया कॉर्पोरेशन, ज़ी न्यूज के संपादक एवं बिजनेस हेड सुधीर चौधरी, आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार और न्यूज़ नेशन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दायर किया। आरोप था कि इन संस्थाओं और व्यक्तियों ने 2013 के IPL सट्टेबाजी विवाद से उनका नाम जोड़ते हुए मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की।

अगस्त, 2025 में हाइकोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया और धोनी का बयान दर्ज करने के लिए वकील आयुक्त नियुक्त किया था। आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार ने एडवोकेट आयुक्त की नियुक्ति को चुनौती दी थी लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज की। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर होने के कारण धोनी की अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से सुरक्षा संबंधी दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं।

पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत की अभिरक्षा में रखी गई सीडी की प्रतियां लेने की अनुमति मांगी थी। यह भी बताया गया कि सीडी में हिंदी भाषा में प्रसारित समाचार क्लिप और बहसें हैं, जिनका अनुवाद आवश्यक है। रजिस्ट्रार (आईटी) से परामर्श के बाद अदालत ने कॉपी उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी।

अब ताजा आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सीडी की सामग्री का अनुवाद और लिप्यंतरण कराने का खर्च धोनी को वहन करना होगा।

यह आदेश इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि दीवानी वाद में आवश्यक दस्तावेजों को विधिवत प्रस्तुत करने और उससे जुड़ी लागत वहन करने की प्राथमिक जिम्मेदारी वादी की ही होती है।

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