नर्मदा प्रदूषण पर जनहित याचिका: जबलपुर में बिना शोधन का सीवेज नदी में गिराने के आरोपों पर हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Update: 2026-02-06 09:42 GMT

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नर्मदा नदी में हो रहे गंभीर प्रदूषण को लेकर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि जबलपुर शहर में बड़ी मात्रा में बिना शोधन का सीवेज सीधे नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का पानी खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुका है।

याचिका के अनुसार प्रतिदिन लगभग 98 मिलियन लीटर बिना उपचारित सीवेज जल नर्मदा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। इसके कारण नदी के पानी में हानिकारक बैक्टीरिया विशेष रूप से मानव और पशु मल से उत्पन्न फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा अत्यधिक बढ़ गई, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

चीफ जस्टिस और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट आदित्य सांघी की दलीलें सुनने के बाद मध्य प्रदेश सरकार नगर निगम जबलपुर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता जो स्वयं एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं, उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि बिना रोक-टोक सीवेज का नदी में गिराया जाना और अपशिष्ट जल शोधन की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण नर्मदा का पानी पीने योग्य नहीं रहा है। यह स्थिति न केवल आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पेयजल के अधिकार का भी उल्लंघन है।

जनहित याचिका में मांग की गई कि बिना शोधन के सीवेज के प्रवाह को तत्काल रोका जाए सीवेज शोधन संयंत्रों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए नदी के पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

हाइकोर्ट ने सभी प्रतिवादी प्राधिकरणों से याचिका में लगाए गए आरोपों पर जवाब दाखिल करने को कहा। यह मामला नर्मदा जैसी पवित्र नदी के संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।

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