मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया। अदालत ने गुरुवार को कहा कि सभी संबंधित मामलों की सुनवाई उसी दिन दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगी।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने समय की कमी के कारण आज विस्तृत सुनवाई नहीं कर पाने के चलते अगली तारीख तय की।
यह विवाद धार स्थित 11वीं सदी के ऐतिहासिक स्मारक भोजशाला से जुड़ा है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। यह स्थल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए धार्मिक महत्व रखता है। जहां हिंदू इसे देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानते हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
वर्ष 2003 में ASI द्वारा एक व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज की अनुमति दी गई।
11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश दिया कि वह आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए इस स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे, ताकि इसकी वास्तविक प्रकृति का पता लगाया जा सके। इसके लिए सीनियर अधिकारियों की एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया गया था।
अदालत ने परिसर की व्यापक फोटोग्राफी और बंद कमरों को खोलकर जांच करने की भी अनुमति दी थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2024 को निर्देश दिया कि सर्वे के निष्कर्षों पर कोई कार्रवाई न की जाए और स्थल की स्थिति में कोई बदलाव न किया जाए।
जनवरी, 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामला निस्तारित किए जाने के बाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियां और सुझाव मांगे थे तथा यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।
हाल ही में, मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने विवादित स्थल का दौरा भी किया। वहीं, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सर्वे की वीडियो और फोटो रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा जताया था कि हाईकोर्ट ASI सर्वे की वीडियोग्राफी में दर्ज सभी आपत्तियों पर निष्पक्षता से विचार करेगा।
अब 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होने के साथ इस बहुचर्चित विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।