भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विवादित स्थल का दौरा करने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई से पहले जज स्वयं स्थल का निरीक्षण करेंगे।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली तारीख पर केवल न्यायालय ही स्थल का दौरा करेगा।
यह विवाद धार जिले में स्थित भोजशाला से जुड़ा है जो 11वीं सदी का स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है।
वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए प्रबंध के अनुसार मंगलवार को हिंदू समुदाय यहां पूजा-अर्चना करता है जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज़ अदा करता है।
इससे पहले 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आधुनिक तकनीकों की सहायता से स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था ताकि स्थल की वास्तविक प्रकृति का पता लगाया जा सके। अदालत ने कहा था कि यह सर्वेक्षण कम-से-कम पांच सीनियर अधिकारियों की विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाए।
अदालत ने परिसर की व्यापक फोटोग्राफी कराने और बंद या सील कमरों को खोलकर वहां मौजूद कलाकृतियों और संरचनात्मक तत्वों की वैज्ञानिक जांच की अनुमति भी दी थी।
हालांकि बाद में 1 अप्रैल, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्वेक्षण के परिणामों के आधार पर कोई कार्रवाई न की जाए और ऐसी कोई खुदाई भी न की जाए, जिससे स्थल की वर्तमान स्थिति में बदलाव हो।
जनवरी, 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का निपटारा किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर अपनी आपत्तियां और राय प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी 2026 के आदेश के अनुसार स्थल की वर्तमान स्थिति बनाए रखने को कहा।
ताजा सुनवाई में हाईकोर्ट ने पक्षकारों को 2 अप्रैल तक अपने जवाब, प्रत्युत्तर और आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई पर न्यायालय स्वयं स्थल का निरीक्षण करेगा।