कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश को संशोधित किया और राज्य सरकार को उपायुक्त द्वारा प्राप्त आवेदनों पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने की अनुमति दी। इसमें सीमित समय के लिए 31.08.2022 से आगे की अवधि तक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आयोजित करने के लिए (ईदगाह मैदान) में भूमि का उपयोग करने की मांग की गई थी।

एक्टिंग चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने सरकार द्वारा दायर इंट्रा कोर्ट अपील पर सुनवाई करते हुए कहा,

"भारतीय समाज में धार्मिक, भाषाई, क्षेत्रीय या अनुभागीय विविधताएं शामिल हैं। भारत का संविधान स्वयं समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देता है। धार्मिक सहिष्णुता का सिद्धांत भारतीय सभ्यता की विशेषता है।"

इसमें कहा गया,

"इसलिए, हम इस स्तर पर मामले के अजीबोगरीब तथ्यों में दिनांक 25.08.2022 के अंतरिम आदेश को संशोधित करते हैं और राज्य सरकार को उपायुक्त द्वारा भूमि के उपयोग की मांग करने वाले आवेदनों पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने की अनुमति देते हैं।"

राज्य सरकार ने कर्नाटक स्टेट बोर्ड ऑफ वक्फ द्वारा दायर याचिका में 25 अगस्त को सिंगल जज बेंच द्वारा पारित अंतरिम आदेश पर सवाल उठाते हुए अपील दायर की थी, जिसमें उसने पक्षकारों को जमी़न के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए विषय भूमि का उपयोग करने से रोक दिया था।

इनमें निम्नलिखित उद्देश्य शामिल हैं:

(i) राज्य सरकार/बीबीएमपी को संबंधित भूमि पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाने की अनुमति है।

(ii) विषय भूमि का उपयोग सार्वजनिक खेल के मैदान के रूप में जारी रखा जा सकता है।

(iii) मुस्लिम समुदाय के सदस्य रमज़ान और बकरीद त्योहारों के दिनों में ज़मीन पर नमाज़ अदा करना जारी रख सकते हैं। हालांकि किसी अन्य दिन नमाज़ अदा करने की अनुमति नहीं है।

सरकार के लिए अपील करते हुए एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग के नवदगी ने प्रस्तुत किया कि विचाराधीन भूमि के स्वामित्व के संबंध में विवाद है और उपायुक्त, बैंगलोर शहर को विभिन्न संगठनों से पांच आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें 31.08.2022 को सीमित अवधि के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आयोजित करने के उद्देश्य से भूमि का उपयोग करने की अनुमति मांगी गई है। इसलिए राज्य सरकार को उक्त आवेदन पर उचित निर्णय लेने की अनुमति दी जाए।

बोर्ड के सीनियर एडवोकेट जयकुमार एस पाटिल ने दलील दी कि उन्होंने याचिका का विरोध किया है।

पीठ ने रिकॉर्ड देखने और प्रस्तुत करने पर विचार करने पर कहा,

"ऐसा प्रतीत होता है कि प्रश्न में संपत्ति के स्वामित्व के संबंध में विवाद है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रतिवादी नंबर एक के आदेश के खिलाफ रिट याचिका दिनांकित 06.08.2022 संयुक्त आयुक्त, बीबीएमपी ने अंतरिम राहत के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल से संपर्क किया था। वक्फ ट्रिब्यूनल ने दिनांक 12.08.2022 के आदेश द्वारा मुख्य आवेदन के साथ-साथ आईए पर आकस्मिक नोटिस जारी किया। आदेश दिया और 02.09.2022 तक नोटिस को वापस करने योग्य बना दिया। हालांकि, प्रतिवादी नंबर एक ने 17.08.2022 को ज्ञापन दायर किया और उपरोक्त कार्यवाही को वापस ले लिया। उसके बाद रिट याचिका दायर की गई, जिसमें आदेश दिनांक 06.08.2022 को रद्द करने की राहत की मांग की गई।"

इसके बाद इसने अंतरिम आदेश पारित किया। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश दिनांक 25.08.2022 में निहित शेष निर्देश अपरिवर्तित रहते हैं।

कोर्ट ने कहा,

"यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस आदेश में टिप्पणियां/निष्कर्ष केवल अंतरिम राहत के लिए प्रार्थना पर विचार करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इस अपील में या अदालत के समक्ष लंबित रिट याचिका में मामले की योग्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"

बोर्ड ने संयुक्त आयुक्त, बीबीएमपी द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.08.2022 को चुनौती देते हुए एकल न्यायाधीश की पीठ का दरवाजा खटखटाया, जिसके द्वारा उसके नाम पर भूमि को डिजिटाइज़ या कम्प्यूटरीकृत करने के लिए प्रार्थना की गई, जो कि Sy.No.40 में 2 एकड़ और 5 गुंटा को मापती है। इस अपील को खारिज कर दिया गया।

केस टाइटल: कर्नाटक राज्य बनाम AUQAF का कर्नाटक राज्य बोर्ड

केस नंबर: डब्ल्यूए 809/2022

उपस्थिति: अपीलकर्ता के लिए एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग के नवदगी ए/डब्ल्यू आगा एस एस महेंद्र; कैवेटर प्रतिवादियों के लिए एडवोकेट अजेश कुमार एस के लिए सीनियर एडवोकेट जयकुमार एस पाटिल; आर 3, 4 के लिए एडवोकेट श्रीनिधि वी

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