पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने धारा 41-ए CrPC नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना व्यक्ति को हिरासत में लेने के कारण हरियाणा पुलिस को अवमानना नोटिस जारी किया, व्यक्ति की रिहाई का आदेश दिया

Update: 2023-12-12 10:12 GMT

Punjab & Haryana High Court

पंजाब एंड हर‌ियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में हरियाणा पुलिस की एक हिरासत को "अवैध और अनुचित" घोषित किया। हाईकोर्ट ने सतेंदर कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो और अन्य [2022 लाइव लॉ ( एससी) 577] में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए हरियाणा पुल‌िस को अवमानना नोटिस जारी किया।

मामले में शनिवार देर रात एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया कि एक बेटे और मां, मृगांक मल्होत्रा और गुंजन मल्होत्रा को हरियाणा पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए मां-बेटे और शिकायतकर्ता एक कंपनी का संचालन करते हैं। याचिका में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच व्यवसाय संबंधी विवाद के कारण शिकायतकर्ता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर मां और बेटे को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।

मामले की सुनवाई कर रही है हरियाणा हाइकोर्ट ने हरियाणा पुलिस को रविवार को सूर्योदय से पहले नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत नोटिस, जिसके बारे में दावा किया गया था कि इसे पुलिस ने जारी किया था और कथित तौर पर हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने इसे अस्वीकार कर दिया था, उसमें न तो गवाह के कोई हस्ताक्षर थे और न ही इसे तामील कराने के लिए कोई प्रयास किया गया था।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने कहा, "यह अदालत यह समझने में असमर्थ रही है कि आरोपी द्वारा इनकार करने की स्थिति में, इन माध्यमों से इतनी महत्वपूर्ण वैधानिक आवश्यकता का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। यह सुझाव देने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं आया है कि धारा 41-ए सीआरपीसी की वैधानिक आवश्यकता का अनुपालन करने के लिए कभी कोई प्रयास किया गया था, या तो चिपकाकर या डाक के माध्यम से, जैसा कि 'सतेंदर कुमार अंतिल के मामले (सुप्रा) में अनिवार्य है। धारा 41-ए सीआरपीसी के अनुपालन को प्रतिवादी नंबर 1 ने जैसे पेश किया है, वह अवैध और असंभव है।"

अदालत ने सिटी एसएचओ जतिंदर सिंह और जांच अधिकारी एएसआई रमेश कुमार को यह बताने का निर्देश दिया कि 'सतेंदर कुमार अंतिल' मामले में जारी निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं जारी की गई।

यह देखते हुए कि हिरासत में लिए गए लोगों पर हरियाणा के अंबाला पुलिस स्टेशन में धारा 406, 420, 506 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था, कोर्ट ने कहा, "एफआईआर से पता चलता है कि इसे मुख्य रूप से पार्टियों के बीच एक वाणिज्यिक विवाद के आरोपों के साथ दर्ज किया गया था, हालांकि अस्पष्ट आरोपों के साथ कुछ शीर्ष पुलिस अधिकारियों या मंत्रियों से शिकायतकर्ता के जीवन को खतरा होने की बात कही गई है, (उन पुलिस अधिकारियों का कोई विवरण नहीं दिया गया है।) इसके मद्देनजर, आईपीसी की धारा 406, 420, 506 के तहत अपराधों में अधिकतम सजा 7 साल है, सतेंद्र कुमार अंतिल (सुप्रा) के मामले के संदर्भ में धारा 41-ए सीआरपीसी का अनुपालन अनिवार्य रूप से आवश्यक था।''

जस्टिस मनुजा ने यह भी पाया कि एएसआई द्वारा जारी किया गया नोटिस "कथित बंदी यानी सुभाष उर्फ मृगांक मल्होत्रा को कभी भी जारी नहीं किया जाना था।" कोर्ट ने राज्य के इस रुख को खारिज कर दिया कि मल्होत्रा को नोटिस की पेशकश की गई थी लेकिन उन्होंने इसे प्राप्त करने से इनकार कर दिया।

इसके अलावा, अदालत ने शिकायतकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि एक बार याचिकाकर्ता को पहले ही एफआईआर के खिलाफ हिरासत में लिया जा चुका है और वह पुलिस हिरासत में है, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण के लिए याचिका टिकाऊ नहीं है।

यह कहते हुए कि नोटिस "कथित हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कभी भी पेश या तामील नहीं किया गया था", अदालत ने कहा कि, "उक्त हिरासत में लिए गए व्यक्ति की हिरासत अवैध और अनुचित हो गई है और तदनुसार, उसे अंतरिम जमानत पर तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया जाता है, बशर्ते कि यह सीजेएम/ड्यूटी मजिस्ट्रेट/संबंधित क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए पर्याप्त बेल बांड/स्‍यूरिटी बांड प्रस्तुत करने के अधीन होगी।"

न्यायालय ने अन्य बंदी गुंजन मल्होत्रा के संबंध में राज्य की इस दलील पर भी गौर किया कि "उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था।" उपरोक्त के आलोक में कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर 12 दिसंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

केस टाइटलः डग्गर मल्होत्रा बनाम हरियाणा राज्य और अन्य।

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