गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे से ज़्यादा चली लंबी बहस के बाद बहुमत से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास किया। यह बिल धर्म की परवाह किए बिना शादी, तलाक़, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप को नियंत्रित करने के लिए समान कानूनी ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखता है। यह बिल तब पेश किया गया, जब राज्य द्वारा नियुक्त पैनल ने UCC को लागू करने पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
इस बिल के पास होने के साथ ही गुजरात उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया, जिसने UCC को अपनाया है। उत्तराखंड फरवरी 2024 में UCC बिल पास करने वाला पहला राज्य था।
'गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' नाम का यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में और गुजरात के उन निवासियों पर लागू होगा, जो राज्य की सीमाओं के बाहर रहते हैं। हालांकि, बिल में यह साफ़ किया गया कि यह कोड अनुसूचित जनजातियों (ST) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं।
बिल के "उद्देश्य और कारण" में कहा गया कि इस कोड का मकसद एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसके प्रावधानों में बिल में लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन और उन्हें खत्म करने के लिए औपचारिक प्रक्रियाओं को शामिल किया गया। इसके अलावा, यह दो शादियां करने पर रोक लगाता है, जिसमें कहा गया कि कोई भी व्यक्ति तब तक दूसरी शादी नहीं कर सकता, जब तक उसका पहला जीवनसाथी जीवित हो। इस कोड के तहत शादी तभी वैध मानी जाएगी, जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी न हो।