FMGE 2020: दिल्ली हाईकोर्ट ने गलत प्रश्न के लिए उम्मीदवारों को एक अतिरिक्त मार्क्स देने के आदेश पर रोक लगाई

Update: 2021-08-06 11:06 GMT

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई, जिसमें विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE), दिसंबर 2020 के उम्मीदवारों को एक गलत प्रश्न के लिए एक अतिरिक्त मार्क्स देने का आदेश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने उक्त आदेश को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की अपील पर सुनवाई करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश के क्रियान्वयन पर सुनवाई की अगली तारीख 17 सितंबर तक रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एकल न्यायाधीश पीठ ने 5 जुलाई, 2021 के आदेश में निर्देश दिया कि सभी उम्मीदवारों ने गलत प्रश्न के कारण गलत उत्तर दिया, उन्हें एक अतिरिक्त अंक दिया जाना चाहिए और यह भी कहा कि 150 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों को परीक्षा में उत्तीर्ण माना जाना चाहिए।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अपनी दलीलों का समर्थन करने के लिए इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए हालिया मामलों पर भरोसा किया।

पीठ ने एडवोकेट सिंह की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के पास अपने पक्ष में विश्वास का संतुलन है, जिससे आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जा सकती है।

एकल न्यायाधीश का आदेश

याचिकाकर्ता- डॉक्टरों के एक संघ, जिन्होंने विदेशी विश्वविद्यालयों से अपनी डिग्री प्राप्त की है, ने तर्क दिया कि विवादित प्रश्न तकनीकी रूप से गलत था क्योंकि एसआरएस उल्लिखित सभी चार मापदंडों के बारे में जानकारी देता है और उसमें कोई भी सही उत्तर नहीं था।

कोर्ट ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (आरजीआई) के एक हलफनामे के आधार पर इस तर्क को स्वीकार किया, जिसमें कहा गया कि सैंपल पंजीकरण प्रणाली में मातृ मृत्यु अनुपात शामिल है।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने परीक्षाओं की न्यायिक समीक्षा के पहलू पर कहा कि अदालत के सीमित अधिकार क्षेत्र के बावजूद किसी भी निर्णय में न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। वे चुनौती के लिए अनुमित देते हैं, भले ही एक बहुत छोटी सी स्थिति में। इस दौरान उम्मीदवार यह दिखाने की जिम्मेदारी का निर्वहन करता है कि एक प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत है।

केस का शीर्षक: राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड बनाम एमडी चिकित्सकों का संघ

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