किसानों का विरोध-प्रदर्शनः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इंटरनेट बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया

Update: 2021-02-06 08:29 GMT

हरियाणा राज्य में इंटरनेट सेवाओं की तत्काल बहाली के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है।

यह याचिका संदीप सिंह और अन्य लोगों की ओर एडवोकेट आर.एस. बैंस की ओर से दायर की है, जिसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता का जीवन और प्रैक्टिस इंटरनेट सेवाओं के अचानक निलंबन से प्रभावित हुआ है।

याचिकाकर्ताओं ने बिना किसी पूर्व सूचना के हरियाणा के 17 जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने और बंद करने पर "हरियाणा राज्य और भारत के संघ राज्य के मनमाने कार्य" को चुनौती दी गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी का कार्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 द्वारा सुरक्षित मौलिक अधिकारों के खिलाफ है।

महत्वपूर्ण रूप से, याचिका में कहा गया है,

"इंटरनेट सेवाएं अब मौलिक अधिकारों के हिस्से के रूप में देखी जाती है, क्योंकि किसी भी पेशे की प्रैक्टिस करने से लेकर अभिव्यक्ति की आजादी तक लगभग हर स्वतंत्रता का उपयोग करने के लिए इंटरनेट एक लाइफ लाइन बन गया है। लगभग हर व्यवसाय की गतिविधि इंटरनेट पर व्यापार के लेन-देन के लिए निर्भर करती है और इसलिए इंटरनेट का अचानक बंद होना बड़ी संख्या में लोगों, जिनमें हरियाणा की पूरी आबादी शामिल है, के साथ खिलवाड़ है।"

इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है,

"यह हरियाणा के लोगों पर निंदनीय कृत्य है, क्योंकि यह सरकार द्वारा माना जाता है कि वे पंजाब के शांतिपूर्ण आंदोलनकारी किसानों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और व्यावहारिक रूप से भारत के अन्य सभी राज्यों से बड़ी संख्या में विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार का प्रयोग करेंगे।"

याचिका में आगे कहा गया है कि इंटरनेट शटडाउन किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त करने और सभी प्रकार के विचारों और सूचनाओं को प्रसारित करने और इंटरनेट सेवाओं को बंद करने और किसी व्यक्ति को सूचना की स्वतंत्रता के लिए उपयोग किए बिना, संचार सेवाओं के निलंबन और प्रतिबंधित करता है।

गौरतलब है कि याचिका में कहा गया है कि इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने और बंद करने का कार्य पूरी तरह से मनमाना और अनुचित है और भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी का उल्लंघन है।

पेशे से वकील, याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हाईकोर्ट का पूरा काम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता क़ॉज लिस्ट, मामले की स्थिति की जांच करने में असमर्थ हैं और बहस करने के लिए मामलों में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं।

महत्वपूर्ण रूप से, याचिका में आरोप लगाया है कि इंटरनेट को निलंबित करने का हरियाणा सरकार का निर्णय पूरी तरह से माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ और अन्य (2020) AIR (SC) 1308 के मामले में दिए गए फैसले का उल्लंघन है, जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित किया गया है कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी भी पेशे का अभ्यास करने या इंटरनेट के माध्यम से किसी भी व्यापार, व्यवसाय या बोलने की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19 (1) (ए) और अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत संवैधानिक रूप से प्राप्त है। )।

अंत में, याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी द्वारा पारित अधिसूचना इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करते हुए पूरी तरह से गलत है।

कोर्ट का आदेश

याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (न्यायमूर्ति फतेहदीप सिंह की खंडपीठ) ने शुक्रवार (05 फरवरी) को केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया। मामले को अब सोमवार (08 फरवरी 2021) को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया है।

केस टाइटल - संदीप सिंह और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य [CWP-2672-2021]

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