बॉम्बे हाईकोर्ट ने युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा के तलाक पर जल्द फैसला देने का दिया आदेश, कूलिंग-ऑफ अवधि समाप्त की

भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल को राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को मुंबई के बांद्रा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि वह चहल और उनकी अलग रह रही पत्नी धनश्री वर्मा द्वारा दायर तलाक याचिका पर गुरुवार तक फैसला सुना दे, क्योंकि चहल 22 मार्च से शुरू होने वाले IPL में व्यस्त रहेंगे।
जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने चहल और वर्मा द्वारा दायर याचिका को मंजूरी दी, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत तलाक की डिक्री के लिए अनिवार्य छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि समाप्त करने का अनुरोध किया गया था।
जस्टिस जामदार ने निर्देश दिया, "याचिकाकर्ता नंबर 1 (चहल) आगामी IPL टूर्नामेंट में भाग लेंगे और 21 मार्च के बाद उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसलिए, फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश से अनुरोध किया जाता है कि वह इस याचिका पर कल तक फैसला करें।"
अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति अभी जारी नहीं की गई है।
युजवेंद्र चहल Kings XI Punjab टीम के सदस्य हैं और वह 22 मार्च से IPL में अपनी टीम से जुड़ेंगे।
कोर्ट ने आर्डर में इस तथ्य को भी नोट किया कि चहल और धनश्री वर्मा पिछले ढाई साल से अलग रह रहे हैं और मध्यस्थता के दौरान तय किए गए सहमति शर्तों का पालन कर चुके हैं।
आपको बता दें कि कि यह जोड़ा दिसंबर 2020 में शादी के बंधन में बंधा था और जून 2022 में अलग हो गया। उन्होंने इस साल 5 फरवरी को मुंबई के बांद्रा फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक के लिए याचिका दायर की थी।
दोनों ने संयुक्त रूप से फैमिली कोर्ट से कूलिंग-ऑफ अवधि समाप्त करने का अनुरोध किया था, लेकिन 20 फरवरी को फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
फैमिली कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि चहल ने तयशुदा 4.75 करोड़ रुपये में से केवल 2.37 करोड़ रुपये ही धनश्री को दिए हैं, यानी उन्होंने सहमति शर्तों का केवल आंशिक रूप से पालन किया है।
हालांकि, जस्टिस माधव जामदार के समक्ष चहल ने तर्क दिया कि उनकी सहमति शर्तों के अनुसार, गुजारा भत्ता की दूसरी किश्त केवल तलाक की डिक्री मिलने के बाद दी जानी थी।
इसलिए, न्यायाधीश ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण पहलू को ठीक से नहीं समझा और इस आधार पर याचिका स्वीकार कर ली।