दिल्ली दंगे- हाईकोर्ट ने जमानत अर्ज़ी में आरोपी द्वारा जमा किए गए लोकेशन प्रूफ का जवाब देने के लिए अभियोजन को अंतिम मौका दिया
दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामलों में अंकित चौधरी उर्फ फौजी द्वारा जमानत याचिकाओं के साथ दायर किए गए लोकेशन प्रुफ पर जवाब देने के लिए अभियोजन पक्ष को एक आखिरी मौका दिया। लोकेशन चार्ट दंगे वाले दिन मोबाइल नेटवर्क के अनुसार उसकी मौजूदगी दिखाती है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता 14 एफआईआर में आरोपी है। वह एक साथ सभी स्थानों पर उपस्थित नहीं हो सकता। दूसरी बात, याचिकाकर्ता और सह अभियुक्तों की लोकेशन भी अलग अलग है।।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने आदेश दिया:
"राज्य को दो सप्ताह के भीतर लोकेशन प्रुफ पर अपना जवाब दर्ज करवाने का अंतिम अवसर दिया गया है।"
चौधरी पर एफआईआर 103 और 104/2020 के तहत आरोप लगाया गया कि पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान मारे जाने के बाद मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के शव गोकुलपुरी इलाके में एक गंदे नाले में मिले थे।
पिछली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश ध्रुव पांडे ने कहा कि उक्त लोकेशन चार्ट उन्हें मिला और इस पर उन्होंने प्रतिक्रिया देने के लिए कुछ समय मांगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बात को लेकर भ्रम है कि क्या नाले में मिले शव किसी खास समुदाय के लोगों के थे।
एफआईआर 103/2020 आमीन नामक व्यक्ति की हत्या के मामले से संबंधित है। आमीन का शव तीन मार्च को मिला था जब पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में दंगे हुए थे।
उक्त एफआईआर में चौधरी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने प्रथम दृष्टया राय बनाने के बाद कि आरोपी मौके पर मौजूद था और एक विशेष समुदाय के दंगाइयों को उकसा रहा था, जो उसके उकसाने पर किसी को भी मार सकते थे।
आरोपी अन्य लोगों के साथ "कट्टर हिंदू एकता" नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य था। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली भाषा "अत्यधिक सांप्रदायिक प्रकृति, स्पष्ट रूप से एक विशेष समुदाय के सदस्यों के प्रति वैमनस्य, दुश्मनी और घृणा की भावनाओं को बढ़ावा देने वाली थी।"
मामले के तथ्य 28 मार्च, 2020 के हैं। इसमें हत्या के मामले की जांच एसआईटी, अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी गई थी। चार अप्रैल को अंकित को गिरफ्तार किया गया था, जिसने अन्य सह-आरोपियों के साथ अपराध के कमीशन के बारे में बयान दिया था।
वहीं एफआईआर 104/2020 में आरोप है कि नाला में पड़े एक शव को बाहर निकाला गया और मृतक के शरीर पर चोट के कुछ निशान पाए गए।
इसलिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 149, 201 और 302 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
केस टाइटल: अंकित चौधरी उर्फ फौजी बनाम राज्य
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