दिल्ली न्यायिक सेवा संघ ने कार्यवाही की 'चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग' की निंदा की, वायरल रोहिणी कोर्ट वीडियो को हटाने की मांग की

Update: 2026-05-18 04:48 GMT

दिल्ली न्यायिक सेवा संघ (DJSA) ने रोहिणी कोर्ट जज से जुड़ी अदालत की कार्यवाही के वीडियो क्लिप की कथित अवैध रिकॉर्डिंग और उसे सर्कुलेट करने की कड़ी निंदा की। संघ ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।

यह निंदा तब सामने आई, जब रोहिणी कोर्ट के उत्तर-पश्चिमी जिले के जिला जज-04 श्री राकेश कुमार-V और एक वकील के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया और वकीलों के एक वर्ग ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

शनिवार को जारी एक बयान में DJSA ने न्यायिक अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही से जुड़े क्लिप की "अवैध रिकॉर्डिंग और जानबूझकर सर्कुलेशन" वाली "चौंकाने वाली घटना" पर "कड़ी निंदा और गहरा दुख" व्यक्त किया।

संघ ने कहा,

"न्यायिक कार्यवाही की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करना और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल करना न केवल घोर अनुचित कार्य है, बल्कि यह न्यायिक संस्था की गरिमा, स्वतंत्रता और महिमा पर सीधा हमला भी है।"

संघ ने कहा कि ऐसे कृत्यों का उद्देश्य अदालतों को बदनाम करना, न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास को कम करना और न्यायिक अधिकारियों को उनके संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करते समय अनावश्यक रूप से डराना-धमकाना, उनकी बदनामी करना और उन पर सार्वजनिक दबाव डालना है।

संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद वकीलों द्वारा न्यायिक कार्यों से लगातार दूर रहने की भी आलोचना की। संघ ने कहा कि वकीलों की हड़ताल और बहिष्कार सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनों के विपरीत हैं और न्याय वितरण प्रणाली के लिए हानिकारक हैं।

बयान में कहा गया,

"ऐसे कार्य मुकद्दमेबाजी करने वाली जनता को बंधक बना लेते हैं और अदालतों के कामकाज को ठप कर देते हैं, जिससे न्याय प्रशासन को गंभीर नुकसान पहुंचता है।"

DJSA ने वकीलों के कुछ सदस्यों द्वारा न्यायिक अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में धमकाने, डराने-धमकाने और उन पर दबाव डालने के कथित प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। संघ ने ऐसे आचरण को "बेहद परेशान करने वाला" और कानून के शासन के साथ असंगत बताया।

जज राकेश कुमार-V और अन्य न्यायिक अधिकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए संघ ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता "गैर-समझौता योग्य" है और अदालतों की गरिमा को ठेस पहुंचाने या जजों को डराने-धमकाने के किसी भी प्रयास का कानून के दायरे में रहकर कड़ाई से विरोध किया जाएगा। एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वायरल वीडियो क्लिप्स को हटाने के लिए ज़रूरी निर्देश जारी करे और मुक़दमेबाज़ों व न्याय व्यवस्था के व्यापक हित में न्यायिक कामकाज को तुरंत बहाल करना सुनिश्चित करे।

रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने जज राकेश कुमार का तबादला ज्यूडिशियल एकेडमी में कर दिया।

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