हर जीवन अनमोल है: अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की रोजाना स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित करे सरकार:- हाईकोर्ट

Update: 2026-07-16 07:28 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए और यदि उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए किसी भी तरह के चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता हो तो सरकार तत्काल आवश्यक इलाज उपलब्ध कराए।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और उसे बचाने के लिए सरकार को हर संभव प्रयास करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम पहले से ही सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार जरूरत पड़ने पर आवश्यक इलाज भी उपलब्ध कराया जाएगा।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा,

"हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि सोनम वांगचुक की मेडिकल स्थिति की प्रतिदिन निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत मेडिकल हस्तक्षेप किया जाए।"

खंडपीठ ने मौखिक रूप से भी कहा,

"हम चाहते हैं कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य जांच करें। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी दवा या उपचार की आवश्यकता हो तो तत्काल कदम उठाए जाएं। हर जीवन अनमोल है।"

इसके बाद अदालत ने एडवोकेट राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण किया।याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई कि सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनके जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाए। साथ ही तरल आहार के माध्यम से आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और खनिज देकर उनका जीवन बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का भी अनुरोध किया गया।

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, विशेषकर नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में चल रहा है। बताया गया कि अनशन के तीसरे सप्ताह तक उनका वजन 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है और रक्त शर्करा का स्तर भी कम हो गया, जिसके चलते उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है।

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