दिल्ली दंगा साजिश मामला: उमर खालिद को अंतरिम जमानत देने से कोर्ट का इनकार, कहा- वजह 'अनुचित'

Update: 2026-05-19 12:13 GMT

दिल्ली कोर्ट ने 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज की।

कड़कड़डूमा अदालत के एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेयी ने उमर खालिद की 15 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग ठुकराते हुए कहा कि याचिका में बताए गए कारण राहत देने के लिए पर्याप्त और उचित नहीं हैं।

उमर खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहल्लुम में शामिल होने और 2 जून को निर्धारित अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद में उनकी देखभाल करने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि पहले उमर खालिद और अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने कभी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया यह जरूरी नहीं हो जाता कि हर बार जमानत मांगने पर राहत दे दी जाए।

जज ने कहा कि मामा के चेहल्लुम में शामिल होना इतना आवश्यक नहीं प्रतीत होता।

अदालत ने टिप्पणी की,

“यदि रिश्ता इतना निकट और गहरा था तो मृत्यु के समय ही रिहाई की मांग की जाती, न कि इतने लंबे समय बाद।”

मां की सर्जरी को लेकर अदालत ने कहा कि उमर खालिद की बहनें भी उनकी देखभाल कर सकती हैं और पिता भी उनकी सहायता के लिए मौजूद हैं।

अदालत ने कहा,

“अभियोजन के अनुसार सर्जरी सामान्य प्रकृति की है, जिसमें केवल गांठें हटाई जानी हैं। ऐसे में आवेदक की ओर से किसी विशेष सहायता की वास्तविक आवश्यकता दिखाई नहीं देती। इसलिए अदालत इन कारणों को अनुचित मानते हुए राहत देना उचित नहीं समझती।”

दिल्ली पुलिस ने भी अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि मामले की संवेदनशीलता और व्यापक प्रभावों को देखते हुए उमर खालिद की रिहाई से कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती है।

पुलिस ने अदालत में कहा कि याचिका पूरी तरह निराधार है। इसमें कोई असाधारण, अत्यावश्यक या विशेष परिस्थिति नहीं दिखाई गई, जिसके आधार पर अंतरिम जमानत दी जा सके।

उमर खालिद के खिलाफ दर्ज FIR संख्या 59/2020 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून की गंभीर धाराएं लगाई गईं। इनके अलावा Arms Act, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं भी शामिल हैं।

इस मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, सामाजिक कार्यकर्ता खालिद सैफी, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक और अथर खान समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया।

बाद में उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया।

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