अगर परिवार का कोई सदस्य आवेदन पर विचार करने से पहले सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है तो अनुकंपा रोजगार का दावा समाप्त हो जाता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Update: 2022-09-28 12:04 GMT
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर परिवार का कोई सदस्य आवेदन पर विचार करने से पहले सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है तो अनुकंपा रोजगार का दावा समाप्त हो जाता है।

इस प्रकार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हटाने के सक्षम प्राधिकारी के आदेश को बरकरार रखा, जिसे उसके ससुर के निधन के बाद अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने देखा कि प्राधिकरण द्वारा आवेदन पर विचार करने से पहले ही उसके पति और उसके बहनोई दोनों ने उससे पहले सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।

याचिकाकर्ता ने 7 जनवरी, 2019 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए एक आवेदन दायर किया था और उस पर विचार किया गया और 2 जून, 2021 को अनुमति दी गई।

हालांकि, अंतराल में, उसके पति और उसके बहनोई ने 'शिक्षा कर्मी' के रूप में क्रमशः 1 नवंबर, 2020 और 1 जुलाई 2019 को एक सरकारी विभाग में नौकरी पर लग गए।

हालांकि आवेदन करते समय याचिकाकर्ता के परिवार में किसी के पास सरकारी नौकरी नहीं थी, लेकिन उसके आवेदन पर विचार करने से पहले ही स्थिति बदल गई।

इस प्रकार, कोर्ट के समक्ष सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता की नियुक्ति को रद्द करने में सक्षम प्राधिकारी का निर्णय उचित था या नहीं।

जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज कर दिया और उसे हटाने के आदेश को मंजूरी दे दी।

ऐसा करते समय, बेंच ने एनसी संतोष बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य पर बहुत अधिक भरोसा किया।

कोर्ट ने कहा,

"इस प्रकार, अनुकंपा नियुक्ति के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार के समय लागू नीति प्रासंगिक है और जैसा कि उक्त नीति में प्रावधान है कि अगर परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से ही सरकारी नौकरी में है, तो परिवार का अन्य सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे।"

केस टाइटल: छत्तीसगढ़ राज्य एंड अन्य बनाम श्वेता सिंह

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