'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज पर रोक की मांग: केंद्र की सलाह के बाद हाईकोर्ट ने किया याचिका का निपटारा
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' नामक वेब सीरीज के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका का निपटारा किया। यह फैसला उस समय आया जब केंद्र सरकार ने संबंधित मंच को इस सीरीज को जारी न करने की सलाह दी।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस प्रमोद गोयल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि पंजाब सरकार ने 22 अप्रैल को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर इस वेब सीरीज के प्रसारण पर रोक लगाने और इसके ट्रेलर तक की पहुंच बंद करने का अनुरोध किया था।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि मंत्रालय ने मंच को इस सीरीज को जारी न करने की सलाह दी है।
मंत्रालय ने कहा,
“पंजाब पुलिस ने आशंका जताई है कि इस डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और संज्ञेय अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है।”
पंजाब सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ऐसे कंटेंट के खिलाफ है, जो अपराध को महिमामंडित करता है और युवाओं को गलत दिशा में ले जाता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य अब तक 2600 से अधिक ऐसे लिंक बंद कर चुका है, जिनमें अपराधी गतिविधियों का प्रचार किया गया।
इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की,
“यह एक अच्छा कदम है।”
यह मामला लुधियाना के सांसद द्वारा जनहित याचिका के रूप में दायर किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह वेब सीरीज एक कुख्यात गैंगस्टर के जीवन और उसके अपराध जगत में उभार को दर्शाती है, जिससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि इंटरनेट आधारित मंचों पर उपलब्ध ऐसे ऑडियो-विजुअल कंटेंट का प्रभाव अधिक व्यापक होता है और इसे समाज का बड़ा वर्ग आसानी से देख सकता है, जिससे युवाओं के अपराध की ओर आकर्षित होने का खतरा बढ़ जाता है।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए और केंद्र की ओर से दी गई सलाह के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।