केंद्र सरकार ने गुरुवार (27 अगस्त) को 'मेडिएशन एक्ट 2023' के तहत 'मेडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया' के गठन की सूचना जारी की। इसका हेड ऑफिस दिल्ली में होगा और इसका मकसद सही गाइडलाइंस के ज़रिए भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मेडिएशन (मध्यस्थता) को बढ़ावा देना है।

'मेडिएशन एक्ट, 2023' को मेडिएशन - खासकर इंस्टीट्यूशनल मेडिएशन - को बढ़ावा देने और आसान बनाने के लिए लागू किया गया। इसका मकसद विवादों (चाहे वे कमर्शियल हों या दूसरे तरह के) को सुलझाना, मेडिएशन से हुए समझौतों को लागू करना, मेडिएटर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए एक संस्था बनाना और कम्युनिटी मेडिएशन को बढ़ावा देना है। इसमें काउंसिल के गठन, उसकी संरचना, कर्तव्यों और कामकाज के बारे में भी प्रावधान हैं।

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग द्वारा जारी एक गजट नोटिफिकेशन में कहा गया:

"मेडिएशन एक्ट, 2023 (2023 का 32) की धारा 31 की उप-धारा (1) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार इस एक्ट के उद्देश्यों के लिए 'मेडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया' नाम की एक काउंसिल का गठन करती है, जिसका हेड ऑफिस दिल्ली में होगा।"

बता दें, एक्ट की धारा 31 में मेडिएशन काउंसिल के गठन और उसे एक कानूनी संस्था (कॉर्पोरेट बॉडी) बनाने का ज़िक्र है। धारा 31(1) के अनुसार, केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए इस एक्ट के उद्देश्यों के लिए 'मेडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया' नाम की एक काउंसिल बनाएगी, जो इस एक्ट के तहत अपने कर्तव्यों और कार्यों को पूरा करेगी।

वहीं, धारा 31(2) में कहा गया कि काउंसिल ऊपर बताए गए नाम से कॉर्पोरेट बॉडी होगी, जिसका अस्तित्व हमेशा बना रहेगा (परपेचुअल सक्सेशन) और जिसकी अपनी एक कॉमन सील होगी। इसे इस एक्ट के प्रावधानों के अधीन चल और अचल संपत्ति हासिल करने, रखने और बेचने, और कॉन्ट्रैक्ट करने की शक्ति होगी। साथ ही यह इसी नाम से मुकदमा कर सकेगी या उस पर मुकदमा किया जा सकेगा।

धारा 31(3) में कहा गया कि काउंसिल का हेड ऑफिस दिल्ली में या ऐसी किसी दूसरी जगह पर होगा, जिसे केंद्र सरकार नोटिफाई करे।

इसके अलावा, धारा 31(4) में कहा गया कि काउंसिल केंद्र सरकार के साथ सलाह-मशविरा करके भारत और विदेश में दूसरी जगहों पर भी ऑफिस खोल सकती है। काउंसिल में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक चेयरपर्सन के साथ-साथ दो सदस्य, दो पदेन सदस्य, एक पदेन सदस्य-सचिव और एक पार्ट-टाइम सदस्य शामिल होंगे।

पदेन सदस्यों को छोड़कर काउंसिल के सदस्य अपना पद संभालने की तारीख से चार साल के कार्यकाल के लिए पद पर रहेंगे और उन्हें दोबारा नियुक्त किया जा सकेगा। हालांकि, पदेन सदस्य के अलावा कोई भी सदस्य 70 साल (चेयरपर्सन के मामले में) या 67 साल (अन्य सदस्यों के मामले में) की उम्र पूरी करने के बाद पद पर नहीं रहेगा।

इसके अलावा, अगर चेयरपर्सन को पार्ट-टाइम आधार पर नियुक्त किया जाता है तो नियुक्त किए गए सदस्यों में से कम से कम एक सदस्य फुल-टाइम सदस्य होगा।

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