CBI ने BJP नेता की हत्या के दोषी कांग्रेस विधायक के लिए की आजीवन कारावास की मांग
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार (16 अप्रैल) को बेंगलुरु कोर्ट को बताया कि कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी और अन्य लोगों को, जिन्हें BJP नेता योगेश गौडर की हत्या का दोषी ठहराया गया, बिना किसी छूट के आजीवन कारावास की सज़ा दी जानी चाहिए।
सज़ा की मात्रा पर फैसला कल, यानी शुक्रवार को सुनाया जाएगा।
बुधवार को स्पेशल कोर्ट ने विनय कुलकर्णी और सोलह अन्य लोगों को हत्या और आपराधिक साज़िश का दोषी ठहराया।
गुरुवार को सज़ा सुनाए जाने से पहले हुई सुनवाई (Pre-Sentencing Hearing) के दौरान, CBI की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने जज संतोष गजानन भट के समक्ष दलील दी कि केंद्रीय एजेंसी मृत्युदंड की मांग नहीं कर रही है। इसके बजाय, CBI ने कानून के तहत अनुमत अधिकतम वैकल्पिक सज़ा की मांग की है: यानी, उनके शेष प्राकृतिक जीवन के लिए बिना किसी छूट के आजीवन कारावास।
ASG ने दलील दी,
"सज़ा ऐसी होनी चाहिए जो किए गए अपराध की गंभीरता और समाज की सुरक्षा की आवश्यकता को दर्शाए... मैं इस मामले में मृत्युदंड के पक्ष में नहीं हूँ, लेकिन बिना किसी छूट के शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास की सज़ा दी जानी चाहिए... हत्या का अपराध, जो किसी का जीवन छीन लेता है, उसके प्रति कानून की प्रतिक्रिया भी उतनी ही गंभीर होनी चाहिए। मेरी दलील है कि सज़ा सबसे कठोर और कानून के दायरे में अनुमत होनी चाहिए।"
गौरतलब है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 8(3) में यह प्रावधान है कि किसी आपराधिक मामले में कम से कम दो साल की सज़ा होने पर दोषी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है, बशर्ते कि कोई उच्च न्यायालय उस दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक न लगा दे।
ASG राजू ने उन गंभीर परिस्थितियों की ओर इशारा किया जिनके कारण ऐसी सज़ा देना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कुलकर्णी द्वारा सरकारी तंत्र (State Instrumentalities) के सुनियोजित दुरुपयोग और उसमें की गई हेराफेरी को विशेष रूप से उजागर किया।
तर्क सुनने के बाद अदालत ने सज़ा की मात्रा पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया:
“सज़ा की मात्रा पर आदेश के लिए, मामले को कल (शुक्रवार) के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस बीच जेल अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अगली सुनवाई की तारीख पर आरोपी को शारीरिक रूप से इस अदालत के सामने पेश करें। A2-A16 को अगली सुनवाई की तारीख तक न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है।”
Case Title: CBI v. Basavaraj & Ors.