कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले में निलंबित कर्नाटक डीजीपी के खिलाफ 'मानहानिकारक' सामग्री हटाने का आदेश
बेंगलुरु सेशन कोर्ट ने कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद निलंबित किए गए कर्नाटक के सीनियर पुलिस अधिकारी रामचंद्र राव के. के खिलाफ प्रकाशित या प्रसारित कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने टीवी9 कर्नाटक न्यूज, इंडिया टुडे समूह, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया सहित 30 से अधिक मीडिया संस्थानों को इस संबंध में आदेश जारी किया।
सीसीएच-23 की 25वीं अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस जज की अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक सभी प्रतिवादी मीडिया संस्थान, उनके रिपोर्टर, एंकर या उनके माध्यम से काम करने वाला कोई भी व्यक्ति, वादी के खिलाफ किसी भी प्रकार की मानहानिकारक खबर, टिप्पणी, बयान, आरोप या कॉल रिकॉर्डिंग को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल माध्यमों में प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेंगे।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निषेधाज्ञा टीवी चैनलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब पर भी लागू होगी।
इसके साथ ही अदालत ने मीडिया संस्थानों को निर्देश दिया कि वे निलंबित डीजीपी (सिविल राइट्स एन्फोर्समेंट) से संबंधित सभी कथित मानहानिकारक वीडियो, ऑडियो क्लिप, कॉल रिकॉर्डिंग, दृश्य सामग्री और समाचार रिपोर्ट्स को अपनी वेबसाइटों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से तत्काल हटा दें।
अदालत ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 3 के पालन के अधीन एकपक्षीय अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की जा रही है। इस मामले में अंतरिम आवेदनों पर प्रतिवादियों को तात्कालिक नोटिस जारी किया जाए।
मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की गई।
गौरतलब है कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक कथित वीडियो सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर सीनियर आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव के. को निलंबित कर दिया गया, जिसमें उनके अनुचित आचरण का आरोप लगाया गया। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने अदालत का रुख करते हुए मीडिया ट्रायल और मानहानिकारक प्रचार पर रोक लगाने की मांग की थी।