RSS पर कथित टिप्पणी मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे को अदालत का समन
बेंगलुरु कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों के मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे तथा कांग्रेस नेता मोहम्मद हैरिस नलपाड़ को समन जारी किया।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 (आपराधिक मानहानि) के तहत निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दोनों को 21 जुलाई 2026 को पेश होने का निर्देश दिया।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बेंगलुरु शहर की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की।
निजी शिकायतकर्ता तेजस ए. ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर 2025 को प्रियंक खड़गे ने सामाजिक माध्यम पर लिखा था कि RSS को सरकारी स्थानों और स्कूल परिसरों में किसी भी तरह के कार्यक्रम और शाखा गतिविधियां आयोजित करने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यह लोगों को गलत संदेश दे रहा है, देश को नुकसान पहुंचा रहा है और युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि 14 अक्टूबर 2025 को प्रियंक खड़गे ने एक और पोस्ट में लिखा था, "यदि आपके घर में आपका भाई, बहन, प्रेमिका या कोई अन्य व्यक्ति आरएसएस में काम करता है तो उससे अपना संबंध समाप्त कर दें।"
शिकायतकर्ता के अनुसार इसके दो दिन बाद कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने सामाजिक माध्यम पर एक पोस्ट कर गौरी लंकेश, गोविंद पानसरे और एम. एम. कलबुर्गी की हत्या के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया।
इसके अलावा शिकायत में आरोप लगाया गया कि शांतिनगर विधायक हैरिस के पुत्र मोहम्मद हैरिस नलपाड़ ने अपने एक वीडियो चैनल पर कहा था कि आरएसएस में कोई ताकत नहीं है।
इन टिप्पणियों से स्वयं को आहत बताते हुए शिकायतकर्ता ने तीनों नेताओं के खिलाफ निजी शिकायत दायर की थी।
अदालत ने फिलहाल प्रियंक खड़गे और मोहम्मद हैरिस नलपाड़ के खिलाफ संज्ञान लेते हुए समन जारी किया, जबकि दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की।
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।