गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन करने वाले अखिल गोगोई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के बाद ज़मानत दी

Update: 2020-03-28 06:53 GMT

Gauhati High Court

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (सीएए) के ख़िलाफ़ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले एक्टिविस्ट अखिल गोगोई को ज़मानत दे दी है। गोगोई को इस आंदोलन में भाग लेने के लिए 'राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने" के आरोप के तहत मुक़दमे का सामना कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति अजय लांबा ने उनकी ज़मानत की याचिका की सुनवाई कोरोना वायरस के फ़ैलने की आशंका के मद्देनज़र वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की।

अखिल गोगोई कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के नेता हैं और सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन में भाग लेने की वजह से सरकार ने उन पर राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का मुक़दमा दायर किया।

जस्टिस लांबा ने कहा कि लोक अभियोजक गोगोई के राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के समर्थन में किसी भी तरह का सबूत नहीं पेश कर पाए। सिर्फ़ वे आरोपों और एफआईआर में दर्ज बातों का हवाला देते रहे।

अदालत ने कहा,

"हमने लोक अभियोजन से यह विशेष रूप से पूछा कि किस आधार पर जाँच एजेंसी ने यह निष्कर्ष निकाला कि सीएए के ख़िलाफ़ इस तरह का विरोध प्रदर्शन राज्य के खिलाफ लड़ाई है।

सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) ने हमारे सामने जो दस्तावेज़ पेश किए हैं, जो कि इस मामले के जाँच अधिकारी हैं, उसमें इस तरह का कोई दस्तावेज़ नहीं है कि सीएबी और सीएए के ख़िलाफ़ इस तरह के विरोध प्रदर्शन को जाँच के इस स्तर पर निष्कर्षतः यह माना जाएगा कि याचिकाकर्ता और अन्य आरोपियों ने राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा है।"

अभियोजन का सबसे प्रमुख आरोप यह है कि जिन लोगों का एफआईआर में नाम है वे और अन्य ने आम लोगों को उकसाया कि वे सीएबी और सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करें जिसकी वजह से सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचा और लोक सेवकों को चोट लगी और कुछ लोगों की मौत भी हुई।

अदालत ने इसके बाद उन्हें ज़मानत दे दी और कहा कि वह पिछले 41 दिनों से हिरासत में हैं और आगे उन्हें और हिरासत में रखने से क़ानून या जाँच के किसी तरह के उद्देश्य की सिद्धि नहीं होगी।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें 



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