यूपी में लापता लोगों पर स्वत:संज्ञान जनहित याचिका | हाईकोर्ट ने DGP, होम सेक्रेटरी को 'कमज़ोर' कोशिशों पर तलब किया

Update: 2026-02-11 05:40 GMT

राज्य में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और राज्य पुलिस की निष्क्रियता पर पिछले महीने एक डिवीजन बेंच के आदेश के बाद स्वत:संज्ञान जनहित याचिका (PIL) दर्ज की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, होम और डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस को तलब किया।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस की बेंच ने उन्हें अपने एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया, जिसमें राज्य भर के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों पर दर्ज लापता लोगों के बारे में पूरा डेटा और ऐसे लापता लोगों को ट्रेस करने के लिए इस्तेमाल किए गए सिस्टम को रिकॉर्ड में लाया जाए।

बेंच ने यह भी पूछा कि क्या इस बारे में कोई SOP है। अगर नहीं, तो राज्य सरकार को पुलिस कर्मचारियों और दूसरों के गाइडेंस के लिए एक SOP जारी करने का निर्देश दिया गया ताकि ऐसी जानकारी बिना ध्यान दिए या बिना जांच के न रह जाए।

मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी, जब एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, होम और DGP को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कार्यवाही में शामिल होना होगा और 'ज़रूरी' मुद्दों पर बेंच की मदद करनी होगी।

बता दें, 29 जनवरी को जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने यूपी सरकार की इस बात पर बहुत निराशा जताई थी कि जनवरी, 2024 और जनवरी, 2026 के बीच लगभग 1,08,300 गुमशुदगी की शिकायतें दर्ज की गईं और केवल 9,700 ऐसे मामलों में राज्य पुलिस ने लोगों का पता लगाने के लिए कार्रवाई की।

बेंच ने 'इन री- मिसिंग पर्सन्स इन द स्टेट' नाम की एक PIL रजिस्टर करने का निर्देश दिया। यह आदेश लापता लोगों का पता लगाने में अधिकारियों के शुरुआती तौर पर ढीले रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दिया गया।

कोर्ट ने राज्य के निवासियों द्वारा दर्ज की गई गुमशुदगी की शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए अधिकारियों की ओर से "पूरी तरह से गंभीरता की कमी" पर भी ध्यान दिया।

4 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की PIL बेंच ने यह कहा:

"इसमें कोई शक नहीं कि यह (PIL) पूरे उत्तर प्रदेश में लापता लोगों से जुड़े बड़े पब्लिक इंटरेस्ट के ज़रूरी मुद्दे उठाती है, उन्हें ढूंढने और ऐसे लापता लोगों के करीबी लोगों द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी पर ज़रूरी एक्शन लेने के लिए कोई सिस्टम है, अगर कोई है, तो वह अभी तक असरदार नहीं लग रहा है..."

Case title - In Re- Missing Persons In The State

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