"गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमे से लाभ नहीं मिलना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाने पर याचिकाकर्ता पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमेबाजी से लाभ नहीं मिलना चाहिए, हाल ही में एक याचिकाकर्ता पर 25,000 / - रुपए का जुर्माना लगाया। इस याचिकाकर्ता ने अदालत से भौतिक तथ्यों को छुपाया कि उसने पहले दो अग्रिम जमानत आवेदन दायर किए थे और अदालत के आदेश का पालन नहीं किया था।
जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की पीठ ने विकास कुमार उर्फ विकास अग्रहरी (याचिकाकर्ता) पर जुर्माना लगाया , जिसने आईपीसी की धारा 417, 376, 504, 506 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष 30 जून, 2022 और 19 जुलाई, 2022 को दो अग्रिम जमानत आवेदन दाखिल करने और एकल न्यायाधीशों की पीठ द्वारा पारित आदेशों के बारे में पूरी याचिका में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया। उक्त आदेशों में याचिकाकर्ता से आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने को कहा गया था, लेकिन इस तथ्य की जानकारी याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से छुपाई।
इस प्रकार मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय से भौतिक तथ्यों को छुपाया, न्यायालय ने शुरू में इस प्रकार देखा:
" यह अच्छी तरह से तय है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट द्वारा प्रयोग किया जाने वाला क्षेत्राधिकार असाधारण, न्यायसंगत और विवेकाधीन है और यह जरूरी है कि याचिकाकर्ता रिट कोर्ट का रुख बिना कुछ छुपाए साफ हाथों से करे और सभी तथ्यों को सामने रखे।
एक वादी मुकदमे से संबंधित सभी तथ्यों को बताने के लिए बाध्य है। यदि वह दूसरे पक्ष पर लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण या प्रासंगिक सामग्री को रोकता है तो वह अदालत के साथ-साथ विरोधी पक्षों के साथ भी धोखाधड़ी करने का दोषी होगा।"
इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से याचिकाकर्ता ने वर्तमान रिट याचिका दायर की, वह बहुत अधिक निंदनीय है और याचिकाकर्ता ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया इसलिए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता असाधारण, न्यायसंगत और विवेकाधीन राहत का हकदार नहीं है।
नतीजतन इस रिट याचिका को 25,000/- रुपये का जुर्माना लगाते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सुल्तानपुर के न्यायालय में एक महीने के भीतर 25,000 रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया, जो प्राप्त होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सुल्तानपुर के खाते में तत्काल प्रेषित करेगा।
केस टाइटल - विकास कुमार उर्फ विकास अग्रहरी बनाम गृह विभाग के सचिव और अन्य के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य
[आपराधिक विविध। रिट याचिका नंबर - 5658/2022]
साइटेशन : 2022 लाइव लॉ (एबी) 369
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