गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के एक एडवोकेट अनीक कादरी ने उन्हें राज्य पुलिस की ओर से जारी धारा 41 सीआरपीसी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्हें गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएसजी) सीनियर एडवोकेट आईएच सैयद को कथित रूप से अवैध सहायता प्रदान करने के लिए उक्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

एक व्यावसायिक विवाद के संबंध में सीन‌ियर एडवोकेट सैयद के खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में कादरी को तलब किया गया है। सैयद को गलत तरीके से बंधक बनाने, हमला करने और जबरन वसूली का आरोपी बनाया गया है।

कादरी सीनियर एडवोकेट सैयद के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर में अग्र‌िम जमानत याचिका और एफआईआर रद्द करने के लिए दायर याचिका में सीनियर एडवोकेट सैयद का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं। सैयद को 8 जून को गुजरात हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी गई थी।

15 जून, 2022 को, रात 10:07 बजे, पेठापुर पुलिस ने कादरी को धारा 41ए, सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि सैयद की अवैध सहायता या आश्रय के मामले में कादरी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

कादरी को निर्देश दिया गया है कि वह 16 जून, 2022 को शाम 05:00 बजे पेथापुर थाना, गांधीनगर में मौजूद रहें।

इस नोटिस को जानबूझकर अस्पष्ट बताते हुए, कादरी ने यह कहते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है कि नोटिस में आवेदक के खिलाफ कथित भूमिका की समयसीमा निर्दिष्ट नहीं है और इसलिए, वर्तमान आवेदन दायर किया है।

याचिका में कहा गया है कि उक्त नोटिस में आक्षेप और उसके उद्देश्य के लिए आवेदक की मदद करने या किसी एक आरोपी को आश्रय देने की उसकी कथित भूमिका के लिए पेश होने का उद्देश्य निराधार है, क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही 8.06.2022 के आदेश में कहा चुका है कि आईएच सैयद को जांच से बचने के लिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने की मांग कर रहे थे।

कल, मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति समीर दवे की पीठ ने प्रतिवादी राज्य को एक नोटिस जारी किया और उम्मीद है कि वह आज इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए उठाएगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (जीएचसीएए) ने एडवोकेट अनीक कादरी के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कल एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है। एसोसिएशन द्वारा जारी बयान इस प्रकार है:

"जीएचसीएए अध्यक्ष ने हमारे एसोसिएशन के एक बहुत ही युवा वकील श्री अनिक कादरी के पक्ष में एकजुटता और समर्थन दिखाने के लिए जीएचसीएए की मांग समिति की एक असाधारण अर्जेंट बैठक (परिपत्र और आभासी) बुलाई। श्री कादरी को पुलिस अधिकारी द्वारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 41 ए के तहत अपने वरिष्ठ के अग्रिम जमानत आवेदन में वकालतनामा दाखिल करके अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए सम्मन भेजा गया है...

सम्मन से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें एक रद्द करने वाली याचिका, अग्रिम जमानत आवेदन और अन्य कानूनी कार्यवाही दायर करने में कानूनी सहायता प्रदान करने के मामले में बयान देने के लिए बुलाया गया है, जबकि इस आधिकार का उपयोग करने के लिए संवैधानिक योजना के तहत हर कोई हकदार है...

प्रबंध समिति ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया है:

(i) जीएचसीएए गुजरात हाईकोर्ट या किसी अन्य अदालत के समक्ष दायर कार्यवाही में या श्री अनिक कादरी द्वारा दायर कार्यवाही में हस्तक्षेप करेगा।

(ii) जीएचसीएए पूरे वकील समुदाय की ओर से प्रतिनिधि क्षमता में एक जनहित याचिका/वर्ग कार्रवाई या कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग करेगा और एक वकील की गिरफ्तारी के लिए और एक वकील को सम्‍मन के संबंध में दिशानिर्देश निर्धारित करने की अपील करेगा।

(iii) जीएचसीएए एडवोकेट संरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने और एक कानून पारित करने के लिए इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व देगा।

(iv) जीएचसीएए महाधिवक्ता के समक्ष यह भी अभ्यावेदन देगा कि पुलिस पॉवर का प्रयोग करने की आड़ में एडवोकेटों को पुलिस द्वारा परेशान न किया जाए। 

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