दिल्ली दंगे: राष्ट्रगान गाने को मजबूर किए गए युवक की मौत मामले में कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को किया तलब

Update: 2026-02-06 09:38 GMT

दिल्ली कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान कथित रूप से राष्ट्रगान गाने को मजबूर किए गए 23 वर्षीय फैयाज़ की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों को तलब किया।

यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है जो दंगों के समय सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में फैयाज़ को चार अन्य युवकों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से पीटते हुए और राष्ट्रगान गाने को मजबूर करते हुए देखा गया।

राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक गोयल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए हेड कॉन्स्टेबल रविंदर कुमार और कॉन्स्टेबल पवन यादव को समन जारी किया।

अदालत ने आदेश में कहा,

“जांच अधिकारी और उच्च जांच अधिकारी को यह भी नोटिस जारी किया जाए कि वे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 207 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 230 के तहत अनुपालन के लिए चार्जशीट और उससे संबंधित दस्तावेजों की पर्याप्त प्रतियां दाखिल करें।”

मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को तय की गई।

यह मामला तब CBI को सौंपा गया, जब वर्ष 2024 में दिल्ली हाइकोर्ट ने फैयाज़ की मां किस्मातून की याचिका स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस से जांच हटाकर केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आदेश दिया था।

किस्मातून ने अपने बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की थी।

4 फरवरी को पारित आदेश में अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा साक्ष्य एकत्र किए गए और जांच के आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

कोर्ट ने कहा,

“रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 325 और 304 (भाग-दो) को धारा 34 के साथ पढ़ते हुए अपराध का संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।”

फैयाज़ की मां का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके बेटे को अवैध रूप से हिरासत में रखा उसके साथ मारपीट की और उसे समय पर आवश्यक मेडिकल सुविधा नहीं दी, जिसके कारण 26 फरवरी, 2020 को उसकी मौत हो गई। फैयाज़ की मौत ज्योति नगर पुलिस स्टेशन से रिहा किए जाने के 24 घंटे के भीतर दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में हुई थी।

दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा जांच CBI को सौंपते समय जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच उन लोगों के प्रति सुविधाजनक रूप से नरम रही जिन पर फैयाज़ के साथ निर्ममता से मारपीट करने का संदेह था।

अदालत ने यह भी कहा कि नफरत से जुड़े अपराधों को रोकने के बजाय कुछ पुलिसकर्मी स्वयं भीड़ की हिंसा और भीड़तंत्र में शामिल पाए गए।

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