"आप परिवार के सदस्यों द्वारा गोद लेने का विरोध क्यों कर रहे हैं?" सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में रहने वाली मौसी द्वारा बच्चे को गोद लेने पर CARA से किया सवाल

Update: 2026-06-22 15:21 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) से सवाल किया कि वह अमेरिका में रहने वाली मौसी द्वारा एक नाबालिग लड़की को गोद लेने का विरोध क्यों कर रही है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अथॉरिटी ने ऐसे मामलों में नकारात्मक रवैया अपनाया।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य की बेंच एक 13 साल की लड़की और उसके गोद लेने वाले माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने CARA के उस स्पष्टीकरण को चुनौती दी थी, जिसमें हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 (HAMA) के तहत बच्चे को गोद लेने के बाद भी 'इंटर-कंट्री रिलेटिव एडॉप्शन' (दूसरे देश में रहने वाले रिश्तेदार द्वारा गोद लेना) की प्रक्रिया को रोक दिया गया।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा,

"आप परिवार के सदस्यों द्वारा गोद लेने का विरोध क्यों कर रहे हैं? आप इसके खिलाफ क्यों हैं? परिवार गोद लेना चाहता है, लेकिन सरकारी कागजी कार्रवाई और नियम-कानून की अड़चनें आड़े आ जाती हैं। आपके विभाग का रवैया बहुत नकारात्मक है। हमारे सामने ऐसा यह पहला मामला नहीं आया।"

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका बच्चे को उसकी दिवंगत माँ की बड़ी बहन और जीजा द्वारा गोद लेने से संबंधित है, जो अमेरिका में रहते हैं और 'ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया' (OCI) हैं। याचिका के अनुसार, जुलाई 2024 में माँ की मृत्यु के बाद बच्चे को उसकी मौसी और मौसा ने HAMA के तहत एक रजिस्टर्ड एडॉप्शन डीड (गोद लेने के कानूनी दस्तावेज) के माध्यम से गोद लिया।

याचिका में कहा गया कि शुरू में इस गोद लेने की प्रक्रिया को 'एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022' के चैप्टर VII के तहत 'इंटर-कंट्री रिलेटिव एडॉप्शन' के तौर पर आगे बढ़ाया गया और यह प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी।

हालांकि, CARA द्वारा 9 फरवरी, 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के बाद प्रक्रिया रोक दी गई। इसमें स्पष्ट किया गया कि एक बार HAMA के तहत गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) की धारा 56(3) और 56(4) को देखते हुए उसी मामले को JJ Act, 2015 और 'एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022' के तहत आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

धारा 56(3) में कहा गया कि JJ Act की कोई भी बात HAMA के तहत बच्चों को गोद लेने पर लागू नहीं होती है। धारा 56(4) यह अनिवार्य करती है कि सभी 'इंटर-कंट्री एडॉप्शन' (दूसरे देश में रहने वाले रिश्तेदारों द्वारा गोद लेना) विशेष रूप से JJ Act और CARA द्वारा बनाए गए गोद लेने के नियमों के अनुसार ही किए जाने चाहिए। उस स्पष्टीकरण के आधार पर, ज़िला बाल संरक्षण इकाई ने 15 अप्रैल, 2026 को याचिकाकर्ताओं की अर्ज़ी खारिज कर दी। याचिका में 9 फरवरी के कार्यालय ज्ञापन और अर्ज़ी खारिज करने के आदेश, दोनों को चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भारतीय और अमेरिकी गोद लेने के नियमों में टकराव के कारण परिवार के फिर से एक होने का कोई कानूनी रास्ता उनके पास नहीं बचा है। सितंबर 2025 में अमेरिका ने घोषणा की कि वह अब उन मामलों में हेग एडॉप्शन सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा, जहां HAMA के तहत गोद लेने की प्रक्रिया हुई हो। इसका कारण यह बताया गया कि HAMA, हेग कन्वेंशन ऑन इंटर-कंट्री एडॉप्शन के तहत ज़रूरी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान नहीं करता।

याचिका में कहा गया कि इससे गोद लेने के नियमों (Adoption Regulations) का अध्याय VIII, जो HAMA के तहत गोद लेने के बाद विदेश में बसने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, अमेरिका में बेअसर हो गया। साथ ही JJ Act की धारा 56(3) की CARA द्वारा की गई व्याख्या ने दूसरे देश में रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने (inter-country relative adoption) के लिए अध्याय VII के रास्ते को बंद कर दिया, क्योंकि बच्चे को पहले ही HAMA के तहत गोद लिया जा चुका था।

याचिका का तर्क है कि JJ Act की धाराओं 56(3) और 56(4) के साथ इस स्पष्टीकरण को पढ़ने पर HAMA के तहत सही तरीके से गोद लिए गए बच्चे के लिए दूसरे देश में बसने का कोई रास्ता नहीं बचता, अगर संबंधित देश HAMA गोद लेने के आदेशों के लिए हेग कन्वेंशन के तहत मंज़ूरी देने से इनकार कर दे। इस तरह यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है।

याचिका में CARA के 9 फरवरी, 2026 के कार्यालय ज्ञापन और ज़िला बाल संरक्षण इकाई द्वारा जारी अर्ज़ी खारिज करने का आदेश रद्द करने की मांग की गई। इसमें ऐसे निर्देश देने की भी मांग की गई, जिनसे बच्चे के मामले को दूसरे देश में रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने से संबंधित अध्याय VII के नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सके।

कोर्ट की कार्यवाही

सुनवाई के दौरान, CARA के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और अनुरोध किया कि मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद सुना जाए।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील नूर शेरगिल ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि गोद लेने के लिए अमेरिकी सरकार से मिली मंज़ूरी 20 जुलाई को खत्म हो जाएगी।

कोर्ट ने मामले को 16 जुलाई के लिए तय किया और कहा कि अगर CARA तब तक अपना जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं करता है तो कोर्ट बिना जवाब के ही आगे बढ़ सकता है।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों से मिली मंज़ूरी सिर्फ़ इसलिए बेकार नहीं हो सकती, क्योंकि CARA ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया।

शेरगिल ने आगे अनुरोध किया कि रिट याचिका पर फ़ैसला होने तक CARA आवेदन पर कार्यवाही जारी रखे। उन्होंने बताया कि आवेदन को खारिज करने का आधार एक ऐसा नियम है, जिसे मौजूदा रिट याचिका में चुनौती दी गई।

उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट आख़िरकार याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फ़ैसला देता है तो प्रक्रिया को फिर से शुरू करने में और देरी होगी। इसलिए उन्होंने निर्देश देने का अनुरोध किया कि बैकग्राउंड प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि याचिका सफल होने पर ज़रूरी पत्र तुरंत जारी किया जा सके।

जस्टिस नागरत्ना ने गोद लेने के मामले में CARA के विरोध पर चिंता जताई।

उन्होंने पूछा,

"आप इतना नकारात्मक रुख़ क्यों अपना रहे हैं? माता-पिता को नाबालिग बच्चों को गोद लेने की मंज़ूरी दी जा रही है और वे गोद ले पा रहे हैं। आप इसमें बाधा क्यों बन रहे हैं?"

CARA के वकील ने कहा कि लागू नियमों के तहत बच्चे को संयुक्त राज्य अमेरिका जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के ढांचे को HAMA के तहत गोद लेने की प्रक्रिया के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।

जस्टिस नागरत्ना ने इससे असहमति जताई और कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया का ज़रूरी तौर पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत ही होना ज़रूरी नहीं है और ऐसे गोद लेने के मामलों को JJ Act के तहत मान्यता प्राप्त है।

इसके बाद उन्होंने करीबी रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने के मामलों में CARA के विरोध पर सवाल उठाए। जुड़वां बच्चों को उनके पिता की यूके में रहने वाली बहन द्वारा गोद लेने के एक पुराने मामले का ज़िक्र करते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि CARA ने उस मामले में भी तमाम बाधाएं खड़ी की थीं।

आख़िरकार कोर्ट ने मामले को 16 जुलाई को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया और CARA को निर्देश दिया कि वह इस बीच याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्यवाही के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए, बिना रिट याचिका में CARA के तर्कों पर कोई असर डाले।

Case Title – X v. Central Adoption Resource Authority & Ors.

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