Muttil Tree Felling Case : सुप्रीम कोर्ट ने ऑगस्टीन भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला फॉरेस्ट कोर्ट में ट्रांसफर किया
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के बिजनेसमैन एंटो ऑगस्टीन, रोजी ऑगस्टीन वगैरह के खिलाफ मुट्टिल पेड़ कटाई मामले से जुड़े धोखाधड़ी के केस को स्पेशल फॉरेस्ट कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। यह कोर्ट केरल फॉरेस्ट एक्ट के तहत अपराधों की सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने वायनाड में मुट्टिल पेड़ कटाई मामले में केरल फॉरेस्ट एक्ट, 1961 और इंडियन पीनल कोड, 1860 की धारा 420 (IPC, अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318) के तहत अपराधों के बीच संबंध पर निर्देश जारी किए। साथ ही धोखाधड़ी के केस को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC, चोट्टानिक्कारा) से केरल फॉरेस्ट एक्ट के तहत बनी स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि दोनों केस की सुनवाई एक के बाद एक होगी, एक साथ नहीं, और दोनों केस में सबूत अलग-अलग रिकॉर्ड किए जाएंगे।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने रोजी ऑगस्टीन की याचिका पर ये निर्देश जारी किए। रोजी ऑगस्टीन मुट्टिल पेड़ कटाई मामले के आरोपियों में से एक हैं। उन्होंने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें JMFC चोट्टानिक्कारा के सामने चल रहे धोखाधड़ी के केस में सुनवाई पर रोक लगाने की उनकी अपील खारिज की गई थी।
केस के तथ्यों को देखते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि यह मामला 2021 के मुट्टिल पेड़ कटाई विवाद से जुड़ा है। नॉर्दर्न सर्कल के चीफ कंज़र्वेटर ऑफ़ फॉरेस्ट्स ने लकड़ी इकट्ठा करने, काटने और बेचने के आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी। SIT ने पाया कि याचिकाकर्ता ज़रूरी रिकॉर्ड (जैसे स्टॉक, खरीद और बिक्री रजिस्टर) रखने में नाकाम रहे थे और लकड़ी को गैर-कानूनी तरीके से वन भूमि पर काटा गया और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उसे ट्रांसपोर्ट किया गया। इसके आधार पर आरोपी (याचिकाकर्ता) के खिलाफ़ केरल वन अधिनियम, 1961 की धारा 27(1)(b), (e), (iii) (iv), 39, 40, 52, 61A और केरल वन उपज पारगमन नियम, 1975 के नियम 12 और 23 के तहत अपराधों का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई।
साथ ही मालाबार टिम्बर्स के एमएम अलियार ने भी IPC की धारा 420 के तहत मामला दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी/याचिकाकर्ता ने उन्हें 1.4 करोड़ रुपये की अवैध रूप से उत्पादित लकड़ी की आपूर्ति करके धोखा दिया।
याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट से धोखाधड़ी के मामले पर तब तक रोक लगाने की मांग की, जब तक कि वन मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल न हो जाए। उनका तर्क था कि दोनों मामले एक ही लेन-देन से जुड़े हैं और वन मामले का नतीजा धोखाधड़ी के मामले में उनके बचाव पर असर डालेगा।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद केरलहाई कोर्ट ने भी याचिकाकर्ता की चुनौती खारिज की। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 233 के तहत कानूनी रोक तभी लागू होती है, जब दोनों कार्यवाही एक ही अपराध से संबंधित हों, न कि केवल एक ही लेन-देन से। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दोनों मामले अलग-अलग पुलिस स्टेशनों द्वारा दर्ज किए गए और अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। असल में हाईकोर्ट ने JMFC चोट्टानिक्कारा को निर्देश दिया कि वे 22 सितंबर (आज) से मामले की सुनवाई शुरू करें और छह महीने के भीतर इसका निपटारा करें।
हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
Case: Roji Augustine v State of Kerala (Diary no. 57617/2026)