सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 नवंबर) को चिदंबरम नटराज मंदिर का प्रबंधन पोडु दीक्षितरों (Podhu Dikshitars) से लेकर पांच सदस्यीय बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट को सौंपने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मंदिर के पोडु दीक्षितरों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।

क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश?

मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को श्री सबनायागर मंदिर (Sri Sabanayagar Temple), जिसे चिदंबरम नटराज मंदिर के नाम से जाना जाता है, के प्रशासन से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा करते हुए पांच सदस्यीय प्रबंधन बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था।

जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस ई. मनोहरन की खंडपीठ ने मंदिर के कथित कुप्रबंधन को देखते हुए न्यायिक हस्तक्षेप को आवश्यक माना था।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक प्रशासनिक कमियां दूर नहीं हो जातीं, तब तक यह बोर्ड मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में रखेगा।

कौन-कौन होंगे बोर्ड में शामिल?

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, पांच सदस्यीय बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य शामिल होने थे:

मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी. भरतिदासन को अध्यक्ष बनाया जाना था।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आर. सुरेश कुमार को सह-अध्यक्ष बनाया जाना था।

सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सी. राजेंद्रन को सदस्य नियुक्त किया जाना था।

पोडु दीक्षितरों के सचिव और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के सचिव पदेन सदस्य होने थे।

बोर्ड को क्या जिम्मेदारी दी गई थी?

हाईकोर्ट ने बोर्ड को मंदिर की संपत्तियों, वित्तीय खातों, विरासत संरक्षण और अन्य प्रशासनिक मामलों की निगरानी का जिम्मा सौंपा था।

इसके अलावा, बोर्ड को मंदिर की अतिक्रमित संपत्तियों को वापस लेने, बकाया किराया वसूलने, खातों का उचित रखरखाव करने और कनकसभाई (Kanagasabai) से श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मंदिर की दैनिक पूजा-अर्चना और वार्षिक उत्सवों का संचालन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पोडु दीक्षितरों के विशेष अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।

अनुच्छेद 26 के तहत अधिकारों का हवाला

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को पोडु दीक्षितरों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

उनकी ओर से दलील दी गई कि मंदिर का प्रबंधन बाहरी बोर्ड को सौंपने का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत प्राप्त धार्मिक संप्रदाय के अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के अधिकार में हस्तक्षेप करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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