सुप्रीम कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द करने से इनकार किया, भले ही शुरुआती सबूतों से संकेत मिलता है कि उनकी PhD डिग्री नकली हो सकती है। कोर्ट ने माना कि विवादित डॉक्टरेट डिग्री इस पद के लिए ज़रूरी योग्यता नहीं है, क्योंकि उन्होंने UGC-NET परीक्षा पास करने की अनिवार्य शर्त को अलग से पूरा किया। साथ ही कोर्ट ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी को PhD डिग्री की असलियत की नई जांच करने का निर्देश दिया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वह रोहतक के सत जिंदा कल्याण कॉलेज (जो महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से जुड़ा है) में फिजिकल एजुकेशन के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली अपीलों पर फैसला कर रहे थे।

अपीलकर्ताओं (रिट याचिकाकर्ताओं) ने छठे प्रतिवादी (respondent) की असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति को चुनौती दी और उनकी PhD डिग्री की असलियत पर सवाल उठाए थे, जो कथित तौर पर बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी से मिली थी।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच ने रिट याचिका खारिज की। उन्होंने अपीलकर्ताओं के अधिकार (locus) पर सवाल उठाया, क्योंकि उनके नाम मेरिट लिस्ट में नहीं थे और वे सफल नहीं हो पाए।

हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

विवादित निष्कर्षों में दखल देने से इनकार करते हुए जस्टिस दत्ता द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि चूंकि छठे प्रतिवादी के पास UGC NET पास करने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने की योग्यता थी, इसलिए उनकी नियुक्ति बनी रहेगी।

लागू UGC नियमों की जांच करते हुए बेंच ने पाया कि संबंधित 2010 के नियमों के तहत UGC-NET, SLET या SET पास करना अनिवार्य योग्यता है। जिन उम्मीदवारों के पास लागू UGC नियमों के अनुसार मिली PhD है, उन्हें NET/SLET/SET की ज़रूरत से छूट दी गई। कोर्ट ने यह भी देखा कि हरियाणा में लागू भर्ती मानदंडों के लिए UGC और राज्य सरकार के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

कोर्ट ने पाया कि इस पद के लिए PhD अनिवार्य योग्यता नहीं है। इसके बजाय, PhD एक वांछनीय (desirable) योग्यता है, जबकि NET/SLET/SET योग्यता न होने पर उम्मीदवारों के पास वैध PhD होना ज़रूरी है। छठे प्रतिवादी ने बिना किसी विवाद के UGC-NET परीक्षा पास की।

कोर्ट ने कहा,

“किसी भी तर्क से यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि उनमें ज़रूरी योग्यता की कमी है; हालांकि, हम यह भी कहना चाहेंगे कि यह पूरी तरह मुमकिन है कि उस संदिग्ध Ph.D. डिग्री के लिए मिले अंकों की वजह से वे मेरिट लिस्ट में दूसरे और तीसरे नंबर के उम्मीदवारों से आगे निकल गए हों। अगर उनमें से किसी एक या दोनों ने छठे प्रतिवादी की नियुक्ति पर सवाल उठाया होता, तो स्थिति कुछ और हो सकती है।”

ऊपर बताई गई बातों के आधार पर अपील का निपटारा कर दिया गया।

Cause Title: ANNU KUMAR & ANR. VERSUS MAHARSHI DAYANAND UNIVERSITY ROHTAK & ORS.

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