BREAKING| आरोपी को पुलिस स्टेशन साफ़ करने का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा कोर्ट्स की ज़मानत शर्तों का लिया स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट और ओडिशा के कुछ ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत शर्तों के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। इन शर्तों के तहत आरोपी व्यक्तियों को पुलिस स्टेशन साफ़ करने के लिए कहा गया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस स्वतः संज्ञान मामले आज (सोमवार) पर विचार करेगी।
यह घटनाक्रम हाल की उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें ओडिशा हाईकोर्ट और राज्य की कुछ ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेशों पर प्रकाश डाला गया। इन आदेशों में आरोपी व्यक्तियों को ज़मानत देने की शर्त के रूप में पुलिस स्टेशनों में सफ़ाई का काम करने का निर्देश दिया गया था।
पिछले हफ़्ते 'आर्टिकल 14' द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में खनन-विरोधी विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में ऐसे निर्देश जारी किए गए। रिपोर्ट में बताया गया कि जिन आरोपियों पर ये शर्तें लागू की गई हैं, वे दलित और आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं।
रिपोर्ट में ओडिशा हाईकोर्ट द्वारा 28 मई, 2025 को पारित आदेश का ज़िक्र किया गया, जिसमें कुमेश्वर नायक नामक व्यक्ति को "दो महीने तक हर सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे के बीच काशीपुर पुलिस स्टेशन परिसर की सफ़ाई करने" का निर्देश दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 और जनवरी 2026 के बीच ऐसे आठ आदेश पारित किए गए। इनमें से सात आदेश रायगड़ा ज़िला कोर्ट्स द्वारा, जबकि एक आदेश हाईकोर्ट द्वारा पारित किया गया।
इन आठ मामलों में से छह आवेदक दलित समुदाय से और दो आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं।
Case : In Re : Condition Being Imposed While Granting Bail By High Court Of Orissa and District Courts in the State of Odisha and ancillary issues | SMW(Crl) 2/2026