VVPAT स्लिप पर वोटिंग का सटीक समय दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला ECI पर छोड़ा

Update: 2026-05-27 11:47 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें VVPAT स्लिप पर वोट डाले जाने का सटीक समय दर्ज करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा जरूर है, लेकिन इसकी तकनीकी व्यवहार्यता तय करना चुनाव आयोग (ECI) के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को किसी ठोस निर्देश के बिना निपटा दिया और रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका को चुनाव आयोग के पास एक प्रतिनिधित्व (representation) के रूप में भेजा जाए।

याचिकाकर्ता नल्ला सुरेश रेड्डी ने मांग की थी कि VVPAT स्लिप पर उम्मीदवार का नाम, चुनाव चिन्ह और सीरियल नंबर के साथ-साथ वोट रिकॉर्ड होने का सटीक समय भी प्रिंट किया जाए। याचिका में कहा गया था कि मौजूदा व्यवस्था में “ऑडिट गैप” है, क्योंकि VVPAT स्लिप यह नहीं बताती कि वोट कब डाला गया था।

सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने दलील दी कि खासकर मतदान के अंतिम घंटों में अचानक बढ़े वोट प्रतिशत या देर रात मतदान को लेकर उठने वाले विवादों की जांच में टाइम-स्टैम्पिंग मददगार हो सकती है। उन्होंने कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन क्षमता बढ़ेगी, बिना मतदाता की गोपनीयता प्रभावित किए।ड्वोकेट

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सवाल चुनावी अखंडता से जुड़ा है, लेकिन VVPAT में समय दर्ज करना तकनीकी रूप से संभव है या नहीं, इसका फैसला चुनाव आयोग ही कर सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया था कि वोट डालने के समय की जानकारी किसी मतदाता की पहचान से जुड़ी नहीं होगी, इसलिए बैलेट की गोपनीयता पर असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, VVPAT रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, स्ट्रॉन्ग रूम लॉग और शिकायत रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए भी दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों — डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी बनाम ECI (2013) और चंद्रबाबू नायडू बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2019) — का हवाला देते हुए कहा कि VVPAT पहले ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी माना जा चुका है और मौजूदा मांग केवल उसी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक सीमित सुधार है।

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