सुप्रीम कोर्ट का इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध- लंबे समय से लंबित सर्विस विवादों का प्राथमिकता के आधार पर करें निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह लंबे समय से लंबित सेवा विवादों की पहचान करें और उनके शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कर्मचारी अक्सर दशकों तक सेवा मामलों को लेकर मुकदमा लड़ते रहते हैं। साथ ही कभी-कभी तो वे अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच जाते हैं।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्देश तब जारी किया, जब वह एक सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 29 साल पुराने एक विवाद के संबंध में कैडर के पुनर्वितरण की मांग की गई।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि सेवा विवादों का लंबे समय तक लंबित रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है और इससे कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बेंच ने कहा,
"यह सोचना कठिन है कि ऐसे और भी कई मामले नहीं होंगे, जहां सेवा विवाद के लंबे समय तक लंबित रहने के कारण संबंधित पक्ष सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब पहुंच रहा हो, जैसा कि इस मामले में भी हुआ है। अतः, हाईकोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस से यह अनुरोध किया जाता है कि वे ऐसे लंबे समय से लंबित मामलों की संख्या का पता लगाएं और उन्हें विभिन्न पीठों (Benches) के बीच वितरित करके शीघ्रता से निपटाने का प्रयास करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन मामलों पर अपेक्षाकृत कम समय-सीमा के भीतर सुनवाई हो और उनका निपटारा किया जा सके।"
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकारी कर्मचारी को उसके वैध सेवा लाभ प्रदान करने में हुई लगभग तीन दशक की देरी पर "गहरी पीड़ा" व्यक्त की।
यह अपील राज्य सरकार के कर्मचारी द्वारा दायर की गई। इस कर्मचारी का चयन 1997 में हो गया, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उसकी नियुक्ति 2011 में जाकर की गई। इसके बावजूद, उसे उसकी पसंद के उत्तराखंड कैडर से बाहर ही रखा गया, जबकि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसने अपने बेटे की संज्ञानात्मक दिव्यांगता (Cognitive Disability) को देखते हुए विशेष रूप से उत्तराखंड कैडर को अपनी प्राथमिकता के रूप में इंगित किया।
Cause Title: RAJENDRA SINGH BORA VERSUS UNION OF INDIA & ORS.