जेल की कोठरी में दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत विचाराधीन कैदी की याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के आरोपी विजित विजयन द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में विजयन ने केरल की हाई-सिक्योरिटी जेल की कोठरी में कथित तौर पर दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने का विरोध किया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच विजयन की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जो उसने केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की थी। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के उस निर्देश पर 2 महीने की रोक लगाई, जिसमें कहा गया कि कैदियों को कोठरियों में सिर्फ शाम के समय ही बंद किया जाए (जब तक कि कोई खास वजह न हो)। यह निर्देश 'केरल जेल और सुधार सेवा (प्रबंधन) नियम, 2014' के नियम 238 के तहत दिया गया।
जस्टिस नाथ ने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के निर्देश पर रोक लगाकर सही किया। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले को हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ाए (जहां यह मामला अभी भी लंबित है)। विजयन की ओर से वकील मनिका त्रिपाठी ने दलील दी कि हाईकोर्ट की रोक अभी भी लागू है (जिसका मतलब है कि कैदी को 21 घंटे तक कोठरी में बंद रहना पड़ रहा है), लेकिन बेंच ने इस मामले में दखल देने की ज़रूरत नहीं समझी।
संक्षेप में कहें तो विजयन एक विचाराधीन कैदी है, जिस पर UAPA की धारा 20, 38 और 39 के तहत आरोप लगाए गए। वह जनवरी 2021 से विय्यूर की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद है। उसके दावों के अनुसार, 4 नवंबर 2024 से उसे और अन्य कैदियों को बिना किसी सूचना या कारण के दिन में 21 घंटे तक कोठरियों में बंद रखा जा रहा है।
2014 के नियमों के नियम 225 और 238 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विजयन ने सबसे पहले स्पेशल कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। स्पेशल कोर्ट ने इस पर पांच दिशा-निर्देश जारी किए।
इन दिशा-निर्देशों में से एक (दिशा-निर्देश संख्या 3) यह था:
"जब तक कोई खास वजह न हो, कैदियों को कोठरी/वार्ड में सिर्फ शाम के समय ही बंद किया जाएगा, जैसा कि नियम 238 में प्रावधान है।"
हालांकि, जेल सुपरिटेंडेंट की अपील पर हाईकोर्ट ने गाइडलाइन नंबर 3 पर रोक लगा दी; याचिकाकर्ता के अनुसार, इस गाइडलाइन में सिर्फ़ नियम 238 का पालन करने का आदेश दिया गया।
याचिका में कहा गया,
"माननीय हाईकोर्ट ने बिना कोई कारण बताए, दो महीने के लिए गाइडलाइन नंबर 3 पर रोक लगाई, जबकि नियम 238 को लेकर कोई संवैधानिक चुनौती या क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति नहीं थी। इस रोक के आदेश से, कैदियों की निजी आज़ादी की रक्षा के लिए बनाए गए एक वैध कानूनी सुरक्षा उपाय पर असल में रोक लग गई, जिससे गैर-कानूनी हिरासत जारी रखने का रास्ता खुल गया और याचिकाकर्ता अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली सुरक्षा से वंचित हो गया।"
Case Title: VIJITH VIJAYAN Versus THE SUPERINTENDENT, HIGH SECURITY PRISON, VIYYUR AND ANR., Diary No. 227-2026