अडानी पर लेख लिखने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार रवि नायर की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने को कहा

Update: 2026-03-16 08:43 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पत्रकार रवि नायर की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने गुजरात क्राइम ब्रांच द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी थी। यह नोटिस कथित रूप से अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड की शिकायत के आधार पर जारी किया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता उचित अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

रवि नायर ने 12 फरवरी 2026 को गुजरात के अहमदाबाद स्थित क्राइम ब्रांच द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी थी। यह नोटिस पिछले वर्ष द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित लेख “India's $3.9 billion plan to help Modi's mogul ally after U.S. charges” के संबंध में जारी किया गया था। यह लेख नायर ने वाशिंगटन पोस्ट के तत्कालीन नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख प्रांशु वर्मा के साथ मिलकर लिखा था।

नोटिस में नायर को 19 फरवरी को क्राइम ब्रांच कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया था, ताकि लेख और उससे जुड़े एक ट्वीट के संबंध में प्रारंभिक जांच की जा सके।

नायर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने अदालत में दलील दी कि अडानी समूह की ओर से उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज कराए गए हैं, जिससे उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि क्राइम ब्रांच ने अधिकार क्षेत्र के बिना कार्रवाई की है।

हालांकि, खंडपीठ ने पूछा कि जब मामला क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के समक्ष उठाया जा सकता है तो सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया गया। इस पर ग्रोवर ने कहा कि यह मामला मौलिक अधिकार, विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है।

जब अदालत याचिका पर सुनवाई के लिए राजी नहीं हुई, तो सीनियर एडवोकेट ने हाईकोर्ट जाने तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का अंतरिम संरक्षण देने की मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह राहत देने से भी इनकार कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता ई-फाइलिंग के माध्यम से तुरंत हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने नायर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला भी दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने ऐसे ट्वीट प्रकाशित किए जो कंपनी और अडानी समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए थे।

इस मामले में फरवरी में गुजरात की एक अदालत ने नायर को आईपीसी की धारा 499 के तहत आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की सजा और ₹5,000 का जुर्माना लगाया था। अदालत ने यह तर्क भी खारिज कर दिया था कि उनके पोस्ट जनहित के मुद्दों पर वैध आलोचना थे।

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