पंजाब नगर निकाय चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब नगर निकाय चुनावों में बैलेट पेपर की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से मतदान कराने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव अगले दिन होने हैं और सभी व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी हैं, इसलिए इस चरण पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की खंडपीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट नचिकेता जोशी ने दलील दी कि हाल के वर्षों में पहली बार बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि EVM चुनाव प्रक्रिया का सामान्य तरीका है।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “चुनाव कल हैं, अब क्या किया जा सकता है? समय नहीं बचा है।” जोशी ने बताया कि पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने 14 मई को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी, जिसके अगले ही दिन हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले में कोई “क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि” नहीं है और कोर्ट चल रही चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब नगर चुनाव नियम, 1994 में बैलेट पेपर और EVM दोनों का प्रावधान है, इसलिए राज्य चुनाव आयोग के पास दोनों में से किसी एक को चुनने का अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ADR मामले में बैलेट पेपर पर लौटने को “पिछड़ा कदम” जरूर बताया था, लेकिन मौजूदा नियम बैलेट पेपर के इस्तेमाल को प्रतिबंधित नहीं करते। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
जब याचिकाकर्ता की ओर से बूथ कैप्चरिंग की आशंका जताई गई, तब CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था की समस्या हो, तो केवल EVM भी समाधान नहीं हैं।
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से पेश वकील ने बताया कि ECI स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्यों को EVM उपलब्ध कराता है, लेकिन इसके लिए आमतौर पर छह महीने पहले मांग भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि मशीनों की जांच और अधिकारियों को प्रशिक्षण देने में भी समय लगता है।
सुप्रीम कोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें हाईकोर्ट ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और यदि किसी को आपत्ति है, तो वह चुनाव याचिका दायर कर सकता है।