सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मालवीय नगर और साकेत इलाकों में अनधिकृत निर्माणों से निपटने के लिए सर्वे का आदेश दिया
अनधिकृत निर्माण और ज़मीन के ग़ैर-कानूनी इस्तेमाल के मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) के कामकाज पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज राजधानी के मालवीय नगर और साकेत इलाकों में सर्वे का आदेश दिया।
इसके अलावा, कोर्ट ने न्यूज़ रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के गुरुग्राम में लगभग 93% प्रतिष्ठानों में आग से सुरक्षा के उपाय नहीं हैं। कोर्ट ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह आदेश दिया।
बेंच ने कहा कि IIT दिल्ली के 2 सीनियर प्रोफेसरों को उस टीम का हिस्सा होना चाहिए जो बताए गए इलाकों का सर्वे करेगी। इस टीम में MCD के अधिकारी और 'एमिक्स क्यूरी' (न्यायालय मित्र) का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। टीम को एक रिपोर्ट दाखिल करनी होगी जिसमें किसी भी तरह की "लापरवाही" नहीं होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि यह आरोप लगाया गया कि अधिकारी सिर्फ़ नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों और प्रॉपर्टी मालिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं, न कि किसी अधिकारी के ख़िलाफ़। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि अधिकारी अगली तारीख तक हलफ़नामा दाखिल करें। इसमें साफ़ तौर पर उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए, जो उन इलाकों के प्रभारी थे, जहां उल्लंघन हुआ है।
यह मामला चेन्नई में रिहायशी कॉलोनी के कमर्शियल इस्तेमाल से जुड़ा है। मार्च में, कोर्ट ने पूरे देश में इन मुद्दों की जांच करने के लिए मामले का दायरा बढ़ा दिया था। इसके लिए, कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों के नगर निकायों को मामले में पक्षकार बनाने और विस्तृत हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया।
इन नगर निकायों को निर्देश दिया गया कि वे "अपने अधिकार क्षेत्र में व्यापक जांच करें और उन इलाकों की पहचान करें, जो सिर्फ़ रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय किए गए, लेकिन संबंधित लोगों द्वारा उनका ग़ैर-रिहायशी कामों के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।"
मई में, सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा (एमिक्स क्यूरी) ने कोर्ट को बताया कि सिर्फ़ 3 राज्यों ने अपने हलफ़नामे दाखिल किए। उन्होंने कहा कि इन हलफ़नामों में यह साफ़ नहीं बताया गया कि अधिकारियों की नज़र में आए उल्लंघनों के ख़िलाफ़ क्या कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यह समस्या बहुत बड़ी है। दिल्ली के बारे में उन्होंने कहा कि सरोजिनी नगर और लाजपत नगर जैसे इलाकों में नियमों का उल्लंघन किसी बड़ी आपदा का खतरा पैदा कर रहा है। बिल्डिंग के नियमों का खुलेआम उल्लंघन और मंज़ूर किए गए प्लान से कहीं ज़्यादा मंज़िला इमारतें बनाने को देखते हुए उन्होंने कहा कि कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसके जवाब में MCD ने कहा कि दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत एक ही जगह का कई तरह से इस्तेमाल करने की इजाज़त थी।
हालांकि, कोर्ट को यह दलील सही नहीं लगी और उसने कहा कि एक बार जब किसी ने खास तरह से ज़मीन के इस्तेमाल के लिए बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी ले ली तो बाद में इस्तेमाल का तरीका बदलना मंज़ूर नहीं है और यह सिस्टम के साथ "धोखाधड़ी" है। कोर्ट ने कहा कि इस बात को नज़रअंदाज़ करना बाहरी वजहों से "नियम तोड़ने वालों के साथ मिलीभगत" का संकेत हो सकता है।
इस हालात को देखते हुए कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने सर्वे के बाद उठाए गए असली कदमों के बारे में जानकारी दें। साथ ही गैर-कानूनी निर्माण, ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव, बिल्डिंग के नियमों के उल्लंघन आदि से जुड़े मामलों को देखने वाले कानूनी अपीलीय अधिकारियों और अर्ध-न्यायिक मंचों से कहा गया कि वे ऐसे मामलों को 3 महीने के अंदर निपटाएं।
सुनवाई के दौरान, MCD की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल SD संजय ने कोर्ट को बताया कि कुछ कदम उठाए गए, जिनकी जानकारी अगली तारीख से पहले विस्तार से रिकॉर्ड पर रखी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि हाल की कुछ घटनाओं (जिनका ज़िक्र सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने किया गया था) को देखते हुए कुछ तुरंत कदम भी उठाए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि इससे न सिर्फ़ कॉरपोरेशन की नेक नीयत का पता चलेगा, बल्कि यह भी पता चलेगा कि बड़े जनहित में कानून का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा,
"हम खास तौर पर MCD के कामकाज को लेकर चिंतित हैं..."
गुरुग्राम और लखनऊ में प्रॉपर्टी से जुड़े उल्लंघनों के बारे में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
"परसों एक दैनिक समाचार पत्र (हिंदुस्तान टाइम्स) में खबर छपी थी कि गुरुग्राम में 93% संस्थान आग से सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हमें गुरुग्राम डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन को निर्देश देना पड़ रहा है कि वे ज़मीन पर उठाए गए असरदार और असली कदमों की रिपोर्ट के साथ [मौजूद रहें]। इसी तरह लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर को भी अगली तारीख पर ज़मीन पर की गई कार्रवाई की पूरी और विस्तृत रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के लिए कहा गया है।"
Case Title: LOGANATHAN v. THE STATE OF TAMIL NADU & ORS., Diary No. - 17103/2026