सरकारी अनुदान न लेने वाले विश्वविद्यालयों पर UGC दिशानिर्देश बाध्यकारी हैं या नहीं? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में Madurai Kamaraj University और उसके घटक कॉलेज तथा University Grants Commission (UGC) को यह स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है कि क्या याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय को UGC या राज्य/केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या UGC Guidelines अनिवार्य (mandatory) हैं या केवल निर्देशात्मक (directory) प्रकृति की हैं, और क्या वे याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी रूप से लागू होती हैं।
यह निर्देश मद्रास हाईकोर्ट के 22 नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय UGC Guidelines से बंधा हुआ है।
विवाद की पृष्ठभूमि
मामले की शुरुआत एक गेस्ट लेक्चरर द्वारा दायर रिट याचिका से हुई थी, जो B.Sc. (Physics) पढ़ाते थे। उन्होंने मांग की थी कि विश्वविद्यालय फरवरी 2010 की UGC Guidelines को गेस्ट लेक्चरर/पार्ट-टाइम टीचर के संदर्भ में लागू करे और उनका मानदेय ₹1000 प्रति घंटा (अधिकतम ₹25,000 प्रति माह) तय किया जाए।
वर्तमान में विश्वविद्यालय उन्हें ₹125 प्रति घंटा और अधिकतम ₹10,000 प्रति माह का भुगतान कर रहा था।
मद्रास हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने विश्वविद्यालय को UGC Guidelines के अनुसार मानदेय देने का निर्देश दिया था। इसके विरुद्ध विश्वविद्यालय ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।
हाईकोर्ट का रुख
डिवीजन बेंच के समक्ष विश्वविद्यालय ने तर्क दिया कि न तो राज्य कानून के तहत और न ही विश्वविद्यालय द्वारा औपचारिक रूप से UGC Regulations को अपनाया गया है, इसलिए वे बाध्यकारी नहीं हो सकते।
वहीं, UGC और गेस्ट लेक्चरर की ओर से कहा गया कि औपचारिक रूप से अपनाए जाने के अभाव में भी विश्वविद्यालय UGC Guidelines से बंधा है।
डिवीजन बेंच ने यह मानते हुए कि विश्वविद्यालय UGC Guidelines का पालन करने के लिए बाध्य है, यह भी कहा था कि पालन न करने की स्थिति में UGC द्वारा मान्यता वापस (derecognition) ली जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मसीह की खंडपीठ ने 13 जनवरी को मामले की सुनवाई की।
खंडपीठ ने पक्षकारों से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यदि याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय को UGC या राज्य/केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिलता है, तो क्या ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व निर्णय में दिए गए निर्देश लागू होंगे, जिसमें कोविड-19 के दौरान UGC द्वारा जारी दिशा-निर्देशों—30 सितंबर 2020 से पहले अंतिम वर्ष/टर्मिनल सेमेस्टर की परीक्षाएं कराने—को वैध ठहराया गया था।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए 28 जनवरी को सूचीबद्ध किया गया है।