'लैंड-फॉर-रेलवे जॉब्स' मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को ट्रायल के दौरान धारा 17A की मंजूरी का मुद्दा उठाने की दी अनुमति

Update: 2026-04-13 06:38 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को कथित 'लैंड-फॉर-जॉब्स' घोटाले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A की लागू होने की वैधता का मुद्दा ट्रायल के दौरान उठाने की अनुमति दे दी। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने से भी छूट दे दी।

जस्टिस एम एम सुन्द्रेश और जस्टिस एन कोटिश्वर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस पर कोई राय नहीं दे रही है कि धारा 17A पूर्वव्यापी (retrospective) है या भावी (prospective)। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रायल के दौरान यह कानूनी मुद्दा उठा सकते हैं और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश इसमें बाधा नहीं बनेगा।

यह मामला 2004-2009 के दौरान रेल मंत्री रहते हुए कथित रूप से नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोपों से जुड़ा है। सीबीआई के अनुसार, रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन लेकर उसे यादव के परिवार या संबंधित कंपनी के नाम ट्रांसफर किया गया।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि धारा 17A तभी लागू होती है जब आरोपी निर्णय लेने या सिफारिश करने वाला अधिकारी हो, जबकि यादव ऐसे पद पर नहीं थे। वहीं, सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आरोप स्वयं दर्शाते हैं कि यादव ने अपने पद का इस्तेमाल कर प्रभाव डाला, इसलिए जांच से पहले अनुमति आवश्यक थी।

कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं किया और इस मुद्दे को ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया। साथ ही, इस याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि सभी कानूनी दलीलें ट्रायल के दौरान उठाई जा सकती हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही यादव की याचिका खारिज कर चुका है, जिसमें उन्होंने FIR और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने माना था कि धारा 17A भविष्य में लागू होती है और 2004-2009 की घटनाओं पर लागू नहीं होगी, साथ ही यह भी कहा कि कथित कृत्य आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े नहीं थे।

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