सिर्फ नियम बदलने से नहीं बदलेगी जमीनी हकीकत: ठोस कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Update: 2026-02-13 10:23 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने देश में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के लागू होने के तरीके पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार नियमों में बदलाव और नए रेगुलेशन लाने के बावजूद जमीनी स्तर पर वांछित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।

पूरा मामला

यह टिप्पणी जस्तित पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने भोपाल नगर निगम की अपील पर सुनवाई के दौरान की। दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कचरा प्रबंधन मानदंडों के उल्लंघन के लिए भोपाल नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया, जिसके खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने संज्ञान लिया कि पुराने नियमों के स्थान पर अब ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 लाए गए, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले हैं। कोर्ट ने इसे एक सराहनीय कदम तो बताया लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी।

बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

"नए नियमों का आना स्वागत योग्य है लेकिन अधिकारियों को प्रभावी तारीख से पहले सारा बुनियादी काम पूरा कर लेना चाहिए। अन्यथा 2026 के नियम भी जमीनी हकीकत सुधारने में नाकाम रहेंगे।"

सुप्रीम कोर्ट ने अवलोकन किया कि नियमों की कमी नहीं है बल्कि फील्ड लेवल पर कई कारणों से वैधानिक तंत्र विफल हो रहा है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि 1 अप्रैल, 2026 से पहले नए नियमों के अनुरूप आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना अनिवार्य है।

बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के कई सीनियर अधिकारियों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है जिनमें शामिल हैं:

1. सचिव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।

2. सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय।

3. सचिव, पंचायती राज मंत्रालय।

4. मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश सरकार।

अगली कार्रवाई

अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि वह अपनी याचिका में संशोधन कर इन अधिकारियों के नाम शामिल करे।

मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी, 2026 को तय की गई।

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