बिहार कथित फर्जी मुठभेड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने की दी छूट

Update: 2026-06-30 12:27 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर में 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में पटना हाईकोर्ट का रुख करने की छूट दी।

जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,

"हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे। हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता देंगे। बेहतर होगा कि हाइकोर्ट जाएं क्योंकि वे ऐसे मामलों की बेहतर निगरानी करते हैं।"

यह जनहित याचिका एडवोकेट विशाल तिवारी ने दायर की थी। याचिका में भारत भूषण तिवारी की कथित न्यायेतर हत्या की जांच CBI से कराने, संबंधित पुलिस दल के खिलाफ FIR दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी।

याचिका के अनुसार 17 जून को बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ में भारत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। इसमें उनके पिता के बयान का हवाला देते हुए दावा किया गया कि हथियार डालने के बाद भी पुलिस ने उन्हें गोली मार दी।

याचिका में यह भी कहा गया कि कथित मुठभेड़ का सीधा प्रसारण भारत भूषण तिवारी ने अपने सामाजिक माध्यम पृष्ठ पर किया। इसके एक दिन पहले ही पुलिस ने उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर बताया था और कहा था कि उन्हें सुरक्षित हिरासत में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना था कि स्थानीय लोगों और मृतक के पिता के आरोपों को देखते हुए यह जांच जरूरी है कि क्या निष्पक्ष जांच कराई गई और क्या पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।

याचिका में कहा गया,

"जब पुलिस ही कानून से ऊपर होकर काम करने लगे तो कानून का शासन कमजोर पड़ जाता है और लोगों के मन में पुलिस के प्रति भय पैदा होता है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।"

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका पर विचार करने से इनकार किया और याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी।

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