प्रदर्शनों से जरूरी सेवाएं बाधित होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जंतर-मंतर याचिका से जोड़ा गया
प्रदर्शनों और रैलियों के कारण जरूरी सेवाओं में होने वाली बाधा और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के मुद्दे पर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया। कोर्ट ने याचिका को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली लंबित याचिका के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट वी. इलनचेजियन ने दलील दी कि प्रदर्शन और रैलियों के कारण अक्सर जरूरी सेवाएं बाधित होती हैं और लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाना भी मुश्किल होता है कि किसी स्थान पर मौजूद व्यक्ति प्रदर्शनकारी है या आम नागरिक। उनके अनुसार, यह समस्या केवल किसी एक स्थान तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश में सामने आ रही है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिका में मांगी गई राहत को लेकर सवाल उठाया।
चीफ जस्टिस ने पूछा,
“लेकिन हमें बताइए हम इस तरह का निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं?”
हालांकि, पीठ ने इसके बावजूद मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई और इसे जंतर-मंतर से संबंधित लंबित याचिका के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।
यह रिट याचिका 29 जुलाई को दायर की गई। माना जा रहा है कि याचिका देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में दायर की गई।
याचिका में मुख्य चिंता यह है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और जरूरी सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति में संतुलन कैसे बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट अब मामले में आगे सुनवाई करेगा।