कृष्ण जन्मभूमि विवाद: सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, मामला हाईकोर्ट भेजने के संकेत सुप्रीम कोर्ट ने दिए
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि वह मामले को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज सकता है। विवाद इस सवाल से जुड़ा है कि भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ सुप्रीम कोर्ट में दायर उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसे वाद संख्या 1 के वादी पक्ष ने दाखिल किया। अपील में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें वाद संख्या 17 के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा लड़ने की अनुमति दी गई।
सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने वादियों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान से पूछा कि क्या सभी वादियों के बीच किसी तरह के समझौते को लेकर कोई प्रगति हुई।
जस्टिस संजय कुमार ने पिछली सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय किसी पक्ष की ओर से यह बताया गया कि मुकदमों में शामिल पक्षकारों के बीच विवादित स्थल को लेकर किसी तरह की बातचीत चल रही है और समझौते की संभावना बन रही है।
श्याम दीवान ने कहा कि उन्हें किसी भी समझौता वार्ता की जानकारी नहीं है। इसके बाद पीठ ने अन्य पक्षों से भी पूछा कि क्या उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी है। किसी पक्ष की ओर से पुष्टि नहीं किए जाने पर कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 9 से 13 की ओर से किए गए अनुरोध पर मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
मामला स्थगित करने से पहले जस्टिस संजय कुमार ने मौखिक रूप से कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को वाद संख्या 1 के वादियों को यह स्पष्ट नोटिस देना चाहिए था कि वह भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर निर्णय करने जा रहा है।
जस्टिस ने यह भी टिप्पणी की कि वाद संख्या 17 में दाखिल आवेदन किसी अन्य विषय से संबंधित था, लेकिन हाईकोर्ट ने अंततः उससे अलग मुद्दे पर फैसला किया।
जस्टिस कुमार ने कहा,
“हमने पहले ही संकेत दिया कि हम इसे वापस भेजने के इच्छुक हैं, क्योंकि हाईकोर्ट ने सभी वादियों को यह नोटिस नहीं दिया कि वह इस मुद्दे पर निर्णय करने जा रहा है। नोटिस दिया गया, लेकिन आवेदन किसी और विषय के लिए था। हम किसी भी स्थिति में इसे वापस भेजने की योजना बना रहे हैं।”
दरअसल, वाद संख्या 17 में दाखिल आवेदन में केवल प्रतिवादियों को मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा लड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। लेकिन जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करने के साथ-साथ वाद संख्या 17 के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों के प्रतिनिधि के रूप में भी मुकदमा लड़ने की अनुमति दी थी।
वाद संख्या 17 भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से उनके निकट मित्र के माध्यम से दाखिल किया गया था। इसके अन्य वादी सुरेंद्र कुमार गुप्ता, महाबीर शर्मा और प्रदीप कुमार श्रीवास्तव हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाद संख्या 17 के वादियों द्वारा दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 8 के तहत दाखिल आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों की ओर से और उनके लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े कुल 18 मुकदमे हैं, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया। इनमें से 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही है, जबकि बाकी मुकदमों की अलग-अलग सुनवाई हो रही है।
हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए वाद संख्या 1 के वादियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। यह वाद भी भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से उनके निकट मित्र के माध्यम से दाखिल किया गया। इसके अन्य वादी रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, करुणेश कुमार शुक्ला, करुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह और त्रिपुरापुरी तिवारी हैं।