सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की वह याचिका खारिज की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कश्मीरी एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज़ को दी गई ज़मानत को चुनौती दी गई थी।

बता दें, परवेज़ पर 'अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट' (UAPA) के तहत मामला दर्ज है, जो कथित तौर पर टेरर फंडिंग से जुड़ा है।

जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने आरोपी के लंबे समय तक जेल में रहने को देखते हुए, हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया।

NIA की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे पेश हुए। आरोपी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट तनवीर अहमद मीर ने बताया कि उनका एक पैर कृत्रिम (प्रोस्थेटिक) है और वे लगभग पांच साल से हिरासत में हैं।

उन्होंने बेंच को यह भी बताया कि आरोप तय करने की प्रक्रिया टाल दी गई, क्योंकि NIA ने 19 अगस्त को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने के लिए समय मांगा था।

इस साल जुलाई में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की हाई कोर्ट बेंच ने परवेज़ को ज़मानत दी थी।

कोर्ट ने माना कि लगभग साढ़े चार साल तक जेल में रहना, ट्रायल की धीमी गति और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को देखते हुए उन्हें ज़मानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

परवेज़ को इस मामले में 22 नवंबर 2021 को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। NIA का आरोप है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा नेटवर्क 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) की भर्ती करता था सुरक्षा प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारी जुटाता था और टेरर फंडिंग में मदद करता था।

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