सुप्रीम कोर्ट में गडचिरोली आगजनी मामले से जुड़े एडवोकेट सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल चंदुरकर ने खुद को मामले से अलग कर लिया।

यह मामला जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। इससे पहले जस्टिस एमएम सुंदरश भी इस मामले की सुनवाई से अलग हो चुके हैं।

मामला वर्ष 2016 के गडचिरोली आगजनी कांड से जुड़ा है, जिसमें सुरेंद्र गाडलिंग ने बॉम्बे हाइकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था।

गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादी साजिश के तहत सुरजगढ़ खदान क्षेत्र में लौह अयस्क ले जा रहे 80 से अधिक वाहनों में आग लगाने की योजना में भूमिका निभाई। इस मामले में उन पर UAPA और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।

गौरतलब है कि गाडलिंग जून, 2018 से भीमा कोरेगांव मामले में भी हिरासत में हैं, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता जताई और पूछा कि क्या किसी व्यक्ति को वर्षों तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रखा जा सकता है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रतियां अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गईं और संबंधित अदालत में स्थायी लोक अभियोजक की भी नियुक्ति नहीं है।

अदालत ने पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा बेहतर करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद कई तारीखों पर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं।

खंडपीठ ने राज्य से यह भी पूछा था कि ट्रायल में देरी के कारण क्या हैं और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।

अब जस्टिस चंदुरकर के खुद को अलग करने के बाद इस मामले की सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी।

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