सुप्रीम कोर्ट ने IRS अधिकारी की ITAT नियुक्ति पर विचार करने में देरी को लेकर DoPT सचिव को अवमानना ​​नोटिस जारी किया

Update: 2026-03-16 13:55 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सचिव, IAS रचना शाह को एक अवमानना ​​याचिका के संबंध में नोटिस जारी किया। यह याचिका इस आरोप पर दायर की गई कि उन्होंने एक IRS अधिकारी की इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) में नियुक्ति पर विचार करने के लिए 'सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी' (SCSC) की बैठक बुलाने में कथित तौर पर विफलता दिखाई है, जबकि इस नियुक्ति प्रक्रिया में पिछले कई वर्षों से बार-बार रुकावटें आ रही थीं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में कोर्ट के 30 जनवरी, 2026 के फैसले का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई। उस फैसले में पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि आदेश पारित होने के चार सप्ताह के भीतर SCSC का गठन करके अपीलकर्ता की नियुक्ति पर विचार किया जाए। साथ ही SCSC के निर्णय से याचिकाकर्ता को अवगत कराया जाए।

याचिकाकर्ता लगभग चार चयन प्रक्रियाओं से गुज़रा था, लेकिन हर बार सरकार ने उसके खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसकी नियुक्ति को रोक दिया।

याचिकाकर्ता के पक्ष में दिए गए एक फैसले में खंडपीठ ने केंद्र सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की थी कि उसने याचिकाकर्ता को ITAT में 'सदस्य (लेखाकार)' के पद पर नियुक्त होने से जानबूझकर रोका। यह तब किया गया, जबकि 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता वाली SCSC ने उसकी नियुक्ति की सिफारिश की थी। उस चयन प्रक्रिया में उसने अखिल भारतीय स्तर पर पहली रैंक (All India Rank 1) हासिल की थी।

खंडपीठ ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा,

"कार्यवाही के हर चरण पर प्रतिवादियों ने या तो मनगढ़ंत आरोप लगाकर, या विभिन्न मंचों द्वारा पारित आदेशों का पालन सुनिश्चित करने में विफल रहकर, याचिकाकर्ता के रास्ते में जानबूझकर बाधाएं खड़ी की हैं।"

कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना (कॉस्ट) भी लगाया।

परिणामस्वरूप, कोर्ट ने DoPT को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर एक नई SCSC की बैठक बुलाए। इस बैठक में यह सुनिश्चित किया जाना था कि संबंधित अधिकारी को शामिल न किया जाए। इसके दो सप्ताह के भीतर बैठक के परिणाम से याचिकाकर्ता को अवगत कराया जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया,

"प्रतिवादी नंबर 1-DoPT यह सुनिश्चित करेगा कि आज से चार सप्ताह की अवधि के भीतर SCSC की एक नई बैठक बुलाई जाए, जिसमें उपरोक्त पद के लिए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर विचार किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उक्त कार्यवाही में 'संबंधित अधिकारी' को शामिल न किया जाए। SCSC की कार्यवाही के परिणाम से याचिकाकर्ता को उसके बाद के दो सप्ताह की अतिरिक्त अवधि के भीतर अवगत कराया जाएगा।"

यह दावा करते हुए कि उपर्युक्त आदेश का पालन नहीं किया गया, याचिकाकर्ता ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना ​​याचिका दायर की, जिनके विरुद्ध 14 अप्रैल, 2026 को जवाब देने हेतु नोटिस जारी किया गया। इस बीच प्रतिवादियों/अवमाननाकर्ताओं की उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी गई।

Cause Title: CAPTAIN PRAMOD KUMAR BAJAJ VERSUS RACHNA SHAH & ANR.

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